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ईरान ने साफ किया रुख: होर्मुज जलमार्ग का नियंत्रण अब तेहरान के पास रहेगा

ईरान संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने संचालन व्यवस्था पर दी सख्त प्रतिक्रिया

तेहरान : अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनावपूर्ण कूटनीतिक वार्ताओं के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान ने अपना कड़ा रुख स्पष्ट कर दिया है। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने साफ कहा है कि यह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जलमार्ग अब कभी भी युद्ध-पूर्व स्थिति में वापस नहीं जाएगा और इसका प्रबंधन ईरान के हाथों में ही रहेगा।

इस मुद्दे पर स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता भी हुई, लेकिन शुरुआत में ही यह वार्ता तनावपूर्ण हो गई थी। अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दिए गए सख्त बयानों और चेतावनियों के कारण पहले दिन की बातचीत विफल हो गई थी, जिसके बाद ईरानी प्रतिनिधि वार्ता से बाहर चले गए थे। हालांकि सोमवार को दोनों पक्षों के बीच फिर से बातचीत हुई और माहौल अपेक्षाकृत बेहतर बताया गया।

ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने बातचीत के बाद अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि युद्ध की शुरुआत से ही ईरान का रुख स्पष्ट था और सभी को यह समझना चाहिए कि होर्मुज जलडमरूमध्य का संचालन अब युद्ध-पूर्व व्यवस्था में वापस नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान ने कभी भी अमेरिका पर भरोसा नहीं किया है और भविष्य में भी ऐसा कोई भरोसा नहीं करेगा।

साथ ही ईरान ने यह भी संकेत दिया कि वह इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर संचालन व्यवस्था को अपने नियंत्रण में रखेगा। गालिबाफ ने कहा कि जलमार्ग में किसी भी तरह की गलतफहमी या टकराव से बचने के लिए दोनों पक्षों ने ‘टेलीफोन हॉटलाइन’ स्थापित करने पर सहमति जताई है।

वार्ता के दौरान यह भी तय हुआ कि ईरान और अमेरिका मिलकर एक समन्वय तंत्र और केंद्र स्थापित करेंगे, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को किसी भी समस्या की स्थिति में सीधे संपर्क करने की सुविधा मिल सके। इसका उद्देश्य संभावित विवादों और गलतफहमियों को रोकना है।

हालांकि रविवार की बातचीत में कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी थी, लेकिन अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वांस ने सोमवार की वार्ता को सकारात्मक बताया है। उन्होंने कहा कि यह बातचीत भविष्य में किसी सफल और अंतिम शांति समझौते के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर सकती है।

इसके साथ ही ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि इस रणनीतिक जलमार्ग को लेकर उसका दृष्टिकोण पूरी तरह संप्रभुता और नियंत्रण पर आधारित रहेगा और किसी भी बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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