गांधीनग : गुजरात के गांधीनगर में स्थित चिल्ड्रन्स रिसर्च यूनिवर्सिटी (सीआरयू) ने स्कूली बच्चों की रचनात्मक सोच को वास्तविक नवाचार और पेटेंट में बदलने के उद्देश्य से एक महत्वाकांक्षी पहल ‘किडनोवेशन’ की शुरुआत की है। यह राज्यव्यापी कार्यक्रम बच्चों की कल्पनाशक्ति को संरचित नवाचार प्रक्रिया से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस छह माह की परियोजना का औपचारिक शुभारंभ आज किया जा रहा है, जो प्रसिद्ध शिक्षाविद् गिजुभाई बधेका की 87वीं पुण्यतिथि के अवसर के साथ जुड़ा हुआ है।
इस कार्यक्रम के माध्यम से गुजरात में शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों के अनुसार किडनोवेशन का उद्देश्य उन बच्चों की प्रतिभा को सामने लाना है, जिनके विचार संसाधनों और मार्गदर्शन के अभाव में अक्सर आगे नहीं बढ़ पाते। इस पहल के तहत एक ऐसा व्यवस्थित ढांचा तैयार किया जाएगा, जिसमें बच्चों के विचारों को पेटेंट योग्य नवाचारों में बदला जा सके।
चिल्ड्रन्स रिसर्च यूनिवर्सिटी के कुलपति टी. एस. जोशी ने बताया कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना से प्रेरित है, जिसमें रचनात्मकता, वैज्ञानिक सोच और अनुभव आधारित शिक्षा पर जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के जरिए गुजरात के प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं की पहचान कर उन्हें मेंटरशिप, तकनीकी सहयोग और कानूनी सहायता प्रदान की जाएगी, ताकि उनके विचारों को पेटेंट तक पहुंचाया जा सके।
कार्यक्रम के प्रमुख लक्ष्यों में भारतीय पेटेंट कार्यालय में 20 से 30 अंतरिम पेटेंट आवेदन दाखिल करना शामिल है। विशेष बात यह है कि इन पेटेंट्स का स्वामित्व पूरी तरह से बाल नवप्रवर्तकों के पास ही रहेगा। इसके साथ ही राज्यभर से चयनित लगभग 100 छात्रों को डिजाइन थिंकिंग, नवाचार और प्रोटोटाइपिंग का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
सीआरयू के एक अधिकारी के अनुसार इस परियोजना के तहत बच्चों के नवाचारों का दस्तावेजीकरण किया जाएगा और लगभग 100 केस स्टडी तैयार कर उन्हें डिजिटल रूप से ‘किडनोवेशन लॉग’ में संरक्षित किया जाएगा। साथ ही, प्राथमिक शिक्षा स्तर पर बौद्धिक संपदा जागरूकता विकसित करने के लिए एक नीति-आधारित शैक्षणिक श्वेत पत्र भी तैयार किया जाएगा, जिसे गुजरात सरकार के शिक्षा विभाग को सौंपा जाएगा।
सीआरयू के प्रशिक्षण केंद्र से जुड़े नीलेश पांड्या ने बताया कि यह कार्यक्रम जून से नवंबर 2026 तक कई चरणों में संचालित होगा। लॉन्च के बाद शिक्षक और विद्यालय समन्वयकों के लिए ओरिएंटेशन सत्र आयोजित किए जाएंगे। जुलाई और अगस्त में विचारों की पहचान और मेंटरशिप पर ध्यान दिया जाएगा, जबकि सितंबर में विशेषज्ञ प्रस्तावित विचारों की पूर्व कला खोज (प्रायर आर्ट सर्च) और मूल्यांकन करेंगे।
इस पहल का एक प्रमुख आकर्षण 15 से 16 अक्टूबर को आयोजित होने वाला दो दिवसीय आवासीय प्रोटोटाइपिंग बूट कैंप होगा, जो चिल्ड्रन्स रिसर्च यूनिवर्सिटी परिसर में आयोजित किया जाएगा। यह आयोजन पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम की जयंती के साथ भी जुड़ा रहेगा। इसमें लगभग 50 चयनित छात्र-छात्राएं भाग लेकर अपने प्रोटोटाइप प्रस्तुत करेंगे।
इसके बाद चयनित नवाचारों के पेटेंट आवेदन और अंतिम प्रक्रिया नवंबर 2026 की शुरुआत तक पूरी की जाएगी। कार्यक्रम का समापन 15 नवंबर को भव्य समारोह और सम्मान कार्यक्रम के साथ होगा, जो गिजुभाई बधेका की जन्म जयंती पर आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर चयनित बाल नवप्रवर्तकों को पेटेंट फाइलिंग प्रमाणपत्र और विशेष सम्मान प्रदान किया जाएगा।
यह परियोजना विभिन्न संस्थानों के सहयोग से लागू की जाएगी, जो पेटेंट ड्राफ्टिंग, प्रोटोटाइपिंग, नवाचार मूल्यांकन, शिक्षक प्रशिक्षण और दस्तावेजीकरण में सहायता प्रदान करेंगे। अधिकारियों का मानना है कि यह पहल न केवल बच्चों की रचनात्मकता को नई दिशा देगी, बल्कि गुजरात को जमीनी स्तर पर नवाचार और बौद्धिक संपदा विकास के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने में भी मदद करेगी।