नई दिल्ली : नई दिल्ली में ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक के दौरान भारत और चीन के बीच उच्चस्तरीय कूटनीतिक संवाद ने द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने का संकेत दिया है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच सोमवार को हुई बैठक में दोनों पक्षों ने संबंधों में हालिया प्रगति की समीक्षा की और उन्हें धीरे-धीरे सामान्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर दिया। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस बातचीत को "रचनात्मक और भविष्य की ओर देखने वाला" बताया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बैठक के बाद सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों में हाल के घटनाक्रमों की समीक्षा की और संबंधों के क्रमिक सामान्यीकरण की दिशा में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने इस बात पर बल दिया कि स्थिर, पूर्वानुमेय और रचनात्मक द्विपक्षीय संबंध दोनों देशों के बीच विश्वास और बेहतर समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिस्री, भारत के राजदूत विक्रम दोराईस्वामी और लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई भी उपस्थित रहे। यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब भारत ब्रिक्स समूह की अध्यक्षता कर रहा है और नई दिल्ली में सोमवार तथा मंगलवार को उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठक की मेजबानी कर रहा है।
भारत और चीन के संबंध वर्ष 2020 में सीमा पर हुए टकराव के बाद गंभीर तनाव के दौर से गुजरे थे। उस घटना के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर लंबे समय तक तनाव बना रहा। हालांकि वर्ष 2024 से दोनों देशों ने तनाव कम करने और संवाद को आगे बढ़ाने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। अजीत डोभाल और वांग यी की ताजा बैठक इसी प्रक्रिया का हिस्सा मानी जा रही है जिसमें टकराव की जगह संरचित संवाद और सहयोग पर बल दिया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि वांग यी ने पिछले वर्ष भी नई दिल्ली का दौरा किया था और अगस्त में विशेष प्रतिनिधियों की 24वीं बैठक के दौरान अजीत डोभाल से मुलाकात की थी। उस समय दोनों पक्षों ने माना था कि 23वीं विशेष प्रतिनिधि वार्ता के बाद से भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनी हुई है। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई थी कि सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखना द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए आवश्यक है।
भारत-चीन संबंधों में आई यह सकारात्मक गति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच हाल के वर्षों में विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हुई बैठकों के बाद और स्पष्ट हुई है। पिछले वर्ष तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन तथा अक्टूबर 2024 में कज़ान में हुई मुलाकातों के दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक प्रगति का स्वागत किया था। दोनों नेताओं ने यह भी दोहराया था कि भारत और चीन प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि विकास साझेदार हैं और मतभेदों को विवाद में नहीं बदलना चाहिए। नई दिल्ली में हुई ताजा वार्ता को इसी व्यापक दृष्टिकोण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।