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शिमला में सैकड़ों महिला कर्मियों का प्रदर्शन, 12 माह वेतन और सामाजिक सुरक्षा लाभ की उठी मांग

मिड-डे मील वर्कर्स का राज्यव्यापी आंदोलन, सरकार पर अनदेखी का आरोप

By प्रियंका महतो

Jun 22, 2026 17:32 IST

शिमला : हिमाचल प्रदेश में मिड-डे मील कर्मियों ने सोमवार को अपनी लंबित मांगों को लेकर राज्यव्यापी हड़ताल की। बेहतर मानदेय, 12 माह का वेतन, पेंशन, ग्रेच्युटी, सामाजिक सुरक्षा लाभ और सेवाओं के नियमितीकरण की मांग को लेकर सैकड़ों महिला कर्मियों ने शिमला में जोरदार प्रदर्शन किया।

सीटू (सीआईटीयू) से संबद्ध मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन के बैनर तले राज्य के विभिन्न जिलों से आई महिला कर्मियों ने राजधानी शिमला में एकत्र होकर टालैंड से राज्य सचिवालय तक विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि उनकी वर्षों पुरानी मांगों की लगातार अनदेखी की जा रही है।

यूनियन नेताओं के अनुसार हिमाचल प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से 500 से 700 महिला कर्मियों ने इस आंदोलन में भाग लिया। सचिवालय के बाहर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के जुटने से कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ, जिसके चलते पुलिस को विशेष प्रबंध करने पड़े।

प्रदर्शनकारी कर्मियों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील योजना को सफलतापूर्वक संचालित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें बेहद कम मानदेय पर काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

यूनियन प्रतिनिधियों ने बताया कि वर्तमान में मिड-डे मील कर्मियों को प्रतिमाह केवल 4,000 से 4,500 रुपये तक का मानदेय मिलता है। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत को देखते हुए यह राशि परिवार चलाने के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार वेतन महीनों तक लंबित रहता है और पूरे वर्ष काम करने के बावजूद उन्हें केवल 10 माह का भुगतान किया जाता है।

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सीटू की राज्य उपाध्यक्ष सुधेश ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के सभी जिलों, यहां तक कि किन्नौर जैसे दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों से भी मिड-डे मील कर्मी आंदोलन में शामिल हुए हैं।

सुधेश ठाकुर ने कहा आज की हड़ताल में हजारों मिड-डे मील कर्मी शामिल हैं। बड़ी संख्या में कर्मी अपने-अपने क्षेत्रों में काम से दूर रहकर हड़ताल का समर्थन कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि यूनियन ने 14 दिन पहले सरकार को हड़ताल का नोटिस दिया था और इससे पहले भी कई बार अपनी मांगें उठाई थीं, लेकिन कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। उनके अनुसार, लगातार अनदेखी के कारण कर्मियों के पास हड़ताल के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।

आर्थिक समस्याओं का जिक्र करते हुए सुधेश ठाकुर ने कहा कि अधिकांश मिड-डे मील कर्मी आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से आते हैं। इनमें बड़ी संख्या में विधवा महिलाएं और अपने परिवार की एकमात्र कमाने वाली सदस्य शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि आज के महंगाई भरे दौर में 4,000 से 4,500 रुपये मासिक आय पर परिवार चलाना लगभग असंभव है। डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार वृद्धि हुई है, लेकिन वर्षों से उनके मानदेय में कोई उल्लेखनीय बढ़ोतरी नहीं की गई।

सुधेश ठाकुर ने केंद्र सरकार की भी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि जीवन-यापन की लागत बढ़ने के बावजूद मिड-डे मील कर्मियों के मानदेय में कई वर्षों से संशोधन नहीं किया गया है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कर्मियों को नियमित अवकाश का लाभ नहीं मिलता और अवकाश लेने पर वेतन कटौती कर दी जाती है। उनका कहना है कि पूरे वर्ष कार्य करने के बावजूद उन्हें केवल 10 माह का वेतन दिया जाता है।

सुधेश ठाकुर ने बताया कि हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने मिड-डे मील कर्मियों को 12 माह का वेतन और अवकाश लाभ देने के पक्ष में फैसला सुनाया था, लेकिन सरकार ने इसे लागू करने के बजाय इस मामले को चुनौती देना उचित समझा।

उन्होंने उच्च न्यायालय के आदेश को तत्काल लागू करने, 12 माह का वेतन देने, अवकाश लाभ उपलब्ध कराने, सम्मानजनक वेतन संरचना लागू करने तथा कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ), पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ देने की मांग की।

सभा को संबोधित करते हुए और बाद में मीडिया से बातचीत में चंबा जिले की मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन की पूर्व जिला महासचिव प्रीति ठाकुर ने कहा कि कर्मी लंबे समय से न्यूनतम वेतन, पूरे साल के भुगतान और सामाजिक सुरक्षा लाभों की मांग कर रहे हैं।

प्रीति ठाकुर ने कहा, “हम वर्षों से न्यूनतम वेतन, 12 माह का भुगतान और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग कर रहे हैं। कई महिलाओं को स्कूल पहुंचने के लिए प्रतिदिन कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें बेहद कम वेतन और सीमित सुविधाएं मिलती हैं।”

यूनियन ने मांग की है कि वर्तमान 4,500 रुपये मासिक मानदेय को बढ़ाकर 7,000 रुपये किया जाए। इसके अलावा ग्रेच्युटी, पेंशन, सामाजिक सुरक्षा कवरेज और सेवाओं के नियमितीकरण के लिए स्पष्ट नीति लागू की जाए।

यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी कि फिलहाल यह केवल एक दिवसीय हड़ताल है, लेकिन यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए तो आंदोलन को और व्यापक तथा तेज किया जाएगा।

राज्यव्यापी हड़ताल ने मिड-डे मील कर्मियों के बीच बढ़ते असंतोष को उजागर किया है। ये कर्मी देश की सबसे बड़ी स्कूली कल्याण योजनाओं में से एक के तहत लाखों बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन उनका कहना है कि उनकी मेहनत और योगदान के अनुरूप सुविधाएं और सम्मान अब तक नहीं मिला है।

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