लंदन : ब्रिटेन की राजनीति में तेजी से उभर रही दक्षिणपंथी पार्टी रिफॉर्म यूके के नेता नाइजेल फराज ने भारतीयों के ब्रिटेन में स्थायी बसने के अधिकार को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने संकेत दिया है कि यदि उनकी पार्टी भविष्य में सत्ता में आती है और वह प्रधानमंत्री बनते है, तो भारतीय नागरिकों समेत अन्य प्रवासियों के लिए स्थायी निवास के नियम बेहद सख्त कर दिए जाएंगे। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुशल भारतीय पेशेवरों के लिए ब्रिटेन में काम करने के अवसर बने रहेंगे।
ब्रिटेन में वर्ष 2029 के आम चुनावों को लेकर राजनीतिक हलचल के बीच नाइजेल फराज की पार्टी रिफॉर्म यूके की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। कई राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह पार्टी सत्ता की दौड़ में गंभीर दावेदार बन सकती है। ऐसे समय में फराज के बयान को ब्रिटेन की भविष्य की आव्रजन नीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
सीएनएन-न्यूज 18 को दिए एक साक्षात्कार में नाइजेल फराज ने कहा कि ब्रिटेन इस समय बढ़ती जनसंख्या के दबाव का सामना कर रहा है, जिसके कारण आवास, सार्वजनिक सेवाओं और बुनियादी ढांचे पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। उनका कहना था कि देश के संसाधनों और आम नागरिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए कुल प्रवासन को नियंत्रित करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिकों को ब्रिटेन में रोजगार के लिए आने की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन इसके लिए समय-सीमित वर्क परमिट की व्यवस्था लागू की जाएगी। अर्थात लोगों को केवल निर्धारित अवधि तक काम करने की अनुमति होगी और कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें अपने देश लौटना होगा। फराज के अनुसार भविष्य में स्थायी निवास का अधिकार देना उनकी प्राथमिकता नहीं होगी।
आव्रजन नीति पर अपनी सोच स्पष्ट करते हुए नाइजेल फराज ने ‘क्वालिटी बनाम क्वांटिटी’ का सिद्धांत सामने रखा। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन को ऐसे लोगों की आवश्यकता है जो कानून का पालन करें, कर का भुगतान करें और देश की अर्थव्यवस्था में योगदान दें। उनके मुताबिक केवल संख्या बढ़ाना समाधान नहीं है, बल्कि योग्य और उपयोगी प्रतिभाओं को अवसर देना अधिक महत्वपूर्ण है।
फराज ने यह भी कहा कि चिकित्सा, प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में अत्यधिक कुशल भारतीय पेशेवरों का ब्रिटेन में स्वागत किया जाएगा। उनका मानना है कि इन क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले लोग देश की अर्थव्यवस्था और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। हालांकि अन्य श्रेणियों में प्रवासन को लेकर उनकी नीति अपेक्षाकृत अधिक सख्त होगी।
दिलचस्प बात यह रही कि भारतीयों के लिए स्थायी बसावट को सीमित करने की बात कहने के बावजूद नाइजेल फराज ने ब्रिटेन में रह रहे हिंदू और सिख समुदायों की खुलकर सराहना की। उन्होंने इन समुदायों की मेहनत, शिक्षा के प्रति समर्पण और कार्य संस्कृति की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी पार्टी किसी भी तरह से भारत-विरोधी नहीं है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फराज का यह रुख एक संतुलित राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है। एक ओर वह ब्रिटेन में बढ़ते प्रवासन को लेकर चिंतित मतदाताओं को संदेश देना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर भारतीय मूल के मतदाताओं और समुदायों को नाराज भी नहीं करना चाहते।
विशेषज्ञों के अनुसार ब्रिटेन की राजनीति और अर्थव्यवस्था में भारतीय मूल के लोगों का प्रभाव लगातार बढ़ा है। ऐसे में भारतीय समुदाय को पूरी तरह अलग-थलग करना किसी भी राजनीतिक दल के लिए आसान नहीं है। यही कारण है कि फराज ने प्रवासन पर सख्त रुख दिखाने के साथ-साथ भारतीय समुदाय की सकारात्मक भूमिका को भी रेखांकित किया।
कुछ अंतरराष्ट्रीय संबंध विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि भविष्य में नाइजेल फराज ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बनते हैं, तो उन्हें भारत के साथ मजबूत कूटनीतिक और आर्थिक संबंध बनाए रखने की आवश्यकता होगी। इसलिए उन्होंने अपने बयान में ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया है, जिससे आव्रजन नीति को लेकर सख्ती का संदेश भी जाए और भारत के साथ संबंधों पर नकारात्मक असर भी न पड़े।
हालांकि आलोचकों का कहना है कि प्रशंसा के साथ पेश किया गया यह संदेश वास्तव में ब्रिटेन की संभावित कठोर आव्रजन नीति की ओर संकेत करता है। उनके अनुसार यदि ऐसे प्रस्ताव लागू होते हैं तो भारतीयों सहित कई देशों के लोगों के लिए ब्रिटेन में स्थायी रूप से बसने की राह पहले की तुलना में अधिक कठिन हो सकती है।