वॉशिंगटन डी.सी. : अमेरिकी राजनीति में एक बार फिर अरबपति उद्योगपति इलॉन मस्क और भारतीय मूल के डेमोक्रेटिक सांसद रो खन्ना के बीच तीखी बयानबाजी चर्चा का विषय बन गई है। सोशल मीडिया पर शुरू हुए इस विवाद में इलॉन मस्क ने सार्वजनिक रूप से रो खन्ना को ‘रो द रॉबर’ यानी ‘डाकू’ कहकर संबोधित किया, जिसके बाद दोनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया। हालांकि रो खन्ना ने भी पीछे हटने के बजाय मस्क को सार्वजनिक बहस की चुनौती दे दी है।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब भारतीय मूल के अमेरिकी कांग्रेस सदस्य रो खन्ना ने इलॉन मस्क की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय विकास एजेंसी (यूएसएआईडी) की सहायता राशि में की गई कटौती के कारण दुनिया भर में लगभग 45 लाख बच्चों का जीवन खतरे में पड़ गया। उन्होंने यह आरोप एक पॉडकास्ट कार्यक्रम में लगाया था। रो खन्ना का कहना था कि उस समय सरकारी दक्षता विभाग (डीओजीई) से जुड़े इलॉन मस्क की भूमिका की जांच होनी चाहिए और उन्हें अपने फैसलों के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
‘न्यूयॉर्क पोस्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार शनिवार को एक पॉडकास्ट में बोलते हुए रो खन्ना ने कहा कि सहायता कार्यक्रमों में कटौती का वैश्विक स्तर पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन फैसलों ने लाखों बच्चों को जोखिम में डाल दिया और इस विषय पर जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
रो खन्ना के इन आरोपों पर इलॉन मस्क ने अपनी सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रतिक्रिया दी। मस्क ने इन दावों को पूरी तरह झूठा बताते हुए खारिज कर दिया। उनका कहना था कि डीओजीई का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना था कि सरकारी धन का सही उपयोग हो रहा है या नहीं। उन्होंने दावा किया कि यूएसएआईडी के कुछ अधिकारियों के खिलाफ धन के दुरुपयोग और चोरी से जुड़े मामलों में न्यायिक कार्रवाई की गई थी तथा कुछ लोगों ने दोष भी स्वीकार किया था।
इसके बाद इलॉन मस्क ने पलटवार करते हुए रो खन्ना के वित्तीय लेनदेन और शेयर बाजार में निवेश को लेकर भी सवाल उठाए। मस्क ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सदस्य होने के कारण रो खन्ना को सरकारी नीतियों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी पहले से मिलती है और उन्होंने इसी आधार पर शेयर बाजार से लाभ कमाया। इसी संदर्भ में मस्क ने उन्हें ‘रो द रॉबर’ कहकर संबोधित किया।
हालांकि रो खन्ना ने इन टिप्पणियों को लेकर कोई नरमी नहीं दिखाई। सोमवार को सीएनबीसी को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने इलॉन मस्क को सीधे सार्वजनिक बहस की चुनौती दे दी। रो खन्ना ने कहा कि यदि मस्क चाहें तो सीएनएन, सीएनबीसी या किसी विश्वविद्यालय के मंच पर खुली बहस की जा सकती है और वह उसमें भाग लेने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने कहा कि डीओजीई से जुड़े विवादों और सरकारी खर्चों में कटौती के प्रभावों पर सार्वजनिक चर्चा होनी चाहिए, ताकि लोगों के सामने सभी तथ्य रखे जा सकें। उनके इस बयान को राजनीतिक हलकों में एक आक्रामक जवाब के रूप में देखा जा रहा है।
रो खन्ना का नाम वर्ष 2028 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के संभावित उम्मीदवारों में भी चर्चा में है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इलॉन मस्क जैसे प्रभावशाली व्यक्ति के खिलाफ खुलकर मोर्चा लेना उन्हें पार्टी के प्रगतिशील वर्ग के बीच और मजबूत बना सकता है।
विश्लेषकों के अनुसार यह विवाद केवल दो प्रभावशाली व्यक्तियों के बीच व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अमेरिका में सरकारी नीतियों, विदेशी सहायता कार्यक्रमों और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर चल रही व्यापक बहस का भी हिस्सा बन गया है। कुछ जानकारों का यह भी मानना है कि रो खन्ना का रुख अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भारतीय मूल के नेताओं के बढ़ते आत्मविश्वास और प्रभाव को दर्शाता है।