नई दिल्ली : भारतीय रेल मंत्रालय द्वारा भविष्य में रेलवे सेवाओं और स्टेशनों पर स्थानीय लोकप्रिय खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने की एक नई पहल पर विचार किया जा रहा है। इस प्रस्ताव के तहत प्रीमियम ट्रेनों और प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर पारंपरिक और किफायती स्नैक्स को यात्रियों तक पहुँचाने की योजना बनाई जा रही है। इसी क्रम में पश्चिम बंगाल का लोकप्रिय व्यंजन झालमुड़ी चर्चा में है, जिसे अब रेलवे की स्नैक लिस्ट में शामिल करने पर विचार हो रहा है।
दिल्ली में रेलवे मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार आगामी समय में वंदे भारत एक्सप्रेस, राजधानी एक्सप्रेस, दुरंतो एक्सप्रेस और शताब्दी एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेनों के यात्रियों को झालमुड़ी जैसे स्वादिष्ट स्नैक्स परोसे जाने की संभावना पर काम चल रहा है। इसके साथ ही देश के बड़े मेट्रो शहरों के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर मोबाइल फूड स्टॉल के माध्यम से खाद्य पदार्थों की बिक्री को भी प्रोत्साहित करने की योजना है।
इस योजना के तहत विशेष रूप से हावड़ा, कोलकाता और सियालदह जैसे प्रमुख स्टेशनों को शामिल किए जाने की संभावना जताई गई है। मंत्रालय का मानना है कि इन स्थानों पर झालमुड़ी जैसे स्वास्थ्यकर, सस्ते और लोकप्रिय व्यंजन यात्रियों के बीच काफी पसंद किए जा सकते हैं और यह एक ब्रांड आइटम के रूप में उभर सकता है।
सूत्रों के अनुसार रेलवे स्टेशनों पर लगाए जाने वाले मोबाइल फूड स्टॉल्स के लिए विक्रेताओं के साथ भारतीय रेलवे एक निश्चित अवधि का अनुबंध करेगा। इस अनुबंध के तहत विक्रेताओं को खाद्य बिक्री का लाइसेंस प्रदान किया जाएगा। सभी विक्रेताओं को निर्धारित मूल्य, गुणवत्ता मानकों और स्वास्थ्य सुरक्षा नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।
रेल मंत्रालय यह सुनिश्चित करने की योजना बना रहा है कि इन स्टॉल्स पर बेचे जाने वाले खाद्य पदार्थ यात्रियों की पहुंच में किफायती रहें और उनकी कीमतें अत्यधिक न हों। इसके साथ ही स्टेशन परिसर में स्वच्छता बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि किसी भी प्रकार का कचरा या गंदगी न फैले।
मोबाइल फूड स्टॉल्स के संचालन के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों को रेलवे के कचरा प्रबंधन संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। इन स्टॉल्स को स्टेशन परिसर के निर्धारित क्षेत्रों में ही संचालित करने की अनुमति दी जाएगी ताकि यात्रियों की आवाजाही में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।
रेल मंत्रालय के अधिकारियों का मानना है कि यदि यह योजना सफल होती है तो झालमुड़ी जैसे पारंपरिक भारतीय स्नैक्स प्रीमियम ट्रेनों और बड़े रेलवे स्टेशनों पर उतनी ही लोकप्रियता हासिल कर सकते हैं जितनी अन्य ब्रांडेड खाद्य वस्तुएं प्राप्त करती हैं। यह पहल स्थानीय स्वाद को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।