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कामाख्या मंदिर में अम्बुबाची मेला शुरू, मासिक धर्म की रूढ़िवादिता को तोड़ते मंदिर में मिलता है अनोखा प्रसाद

मान्यताओं के मुताबिक इस दौरान ब्रह्मपुत्र नदी का पानी भी लाल हो जाता है। मंदिर के कपाट खुलने के बाद श्रद्धालुओं को मिलने वाला प्रसाद भी बड़ा ही अनोखा होता है।

By Moumita Bhattacharya

Jun 23, 2026 19:52 IST

असम के गुवाहाटी में प्रसिद्ध शक्तिपीठ कामाख्या धाम में अम्बुबाची मेले की शुरुआत हो चुकी है। 22 जून को मंदिर के कपाट बंद हो चुके हैं और अगले 3 दिनों तक मंदिर बंद रहेगा। मान्यताओं के मुताबिक अम्बुबाची मेले के दौरान मां कामाख्या रजस्वला होती है।

मान्यताओं के मुताबिक इस दौरान ब्रह्मपुत्र नदी का पानी भी लाल हो जाता है। मंदिर के कपाट खुलने के बाद श्रद्धालुओं को मिलने वाला प्रसाद भी बड़ा ही अनोखा होता है।

नहीं है मूर्ति, योनि कुंड की होती है पूजा

कामाख्या मंदिर की सबसे बड़ी खासियत है कि यहां मां कामाख्या की किसी मूर्ति की पूजा नहीं होती है बल्कि यहां एक प्राकृतिक चट्टान है। इसे योनि कुंड के रूप में पूजा जाता है। मान्यताओं के मुताबिक प्रजापति दक्ष के यज्ञ में पति महादेव के अपमान के बाद देवी सती ने आत्मदाह का रास्ता चुना था, उसके बाद भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र ने उनके शरीर को 51 हिस्सों में खंडित किया था।

इन टुकड़ों में देवी का योनि भाग इसी स्थान पर गिरा था जहां कामाख्या शक्तिपीठ की स्थापना की गयी। कहा जाता है कि योनि कुंड से दिन के 24 घंटे प्राकृतिक जलधारा बहती रहती है।

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3 दिन मंदिर के कपाट रहते हैं बंद

मान्यताओं के मुताबिक अम्बुबाची मेले के दौरान देवी कामाख्या रजस्वला होती हैं। आद्रा नक्षत्र में प्रवेश करने के बाद ही देवी का मासिक धर्म शुरू होता है। इसे नारीत्व के सम्मान का प्रतीक माना जाता है।

इन 3 दिनों तक माता को पूरी तरह से विश्राम देने के लिए ही मंदिर के कपाट को बंद रखा जाता है। इस दौरान देवी की पूजा-अर्चना भी वर्जित होती है। इस साल मंदिर के कपाट 22 जून को बंद हुए थे जो 25 जून को दोबारा खुलेंगे।

अम्बुबाची मेला के शुरुआत से पहले कामाख्या मंदिर में हुई विशेष पूजा Image : ANI

मिलता है अनोखा प्रसाद

3 दिनों बाद जब कामाख्या मंदिर के कपाट खोले जाते हैं तब भक्तों को बड़ा ही अनोखा प्रसाद बांटा जाता है। यह कोई खाने वाली वस्तु नहीं बल्कि अम्बुबाची वस्त्र या अंगोदक वस्त्र होता है। मान्यताओं के अनुसार मंदिर के कपाट बंद करने से पहले माता की शिला पर सफेद रंग का एक सूति का कपड़ा रख दिया जाता है।

कहा जाता है कि जब 3 दिनों बाद मंदिर के कपाट खुलते हैं तब वह कपड़ा पूरी तरह से लाल हो गया होता है। इस लाल रंग के कपड़े का टुकड़ा ही भक्तों में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। इसे पाने के लिए दुनियाभर से श्रद्धालु कतार में खड़े रहते हैं। मान्यताओं में कहा जाता है कि इस वस्त्र को घर में रखने से नकारात्मक ऊर्जा, तंत्र-मंत्र का बुरा प्रभाव दूर रहता है और विपत्तियों से पूरे परिवार की रक्षा होती है।

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