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पूजा न करें तो भी चलेगा, जगन्नाथ देव के केवल दर्शन करने से ही मिलता है पुण्य, दूर होते हैं नवग्रह के दोष

जगन्नाथ देव के दर्शन से नवग्रह का अशुभ प्रभाव कट जाता है। नियमित रूप से जगन्नाथ देव के दर्शन करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं।

By लखन भारती

Jun 05, 2026 18:05 IST

जगन्नाथ जगत के स्वामी हैं। प्रचलित विश्वास के अनुसार इस कलियुग में स्वयं विष्णु जगन्नाथ रूप में पृथ्वी पर विराजमान हैं। ऐसा माना जाता है कि जगन्नाथ देव के दर्शन से बहुत पुण्य की प्राप्ति होती है। ज्योतिषशास्त्र कहता है कि हमारे जीवन में विभिन्न ग्रह और नक्षत्रों का महत्वपूर्ण प्रभाव होता है। कभी-कभी ग्रहों के शुभ प्रभाव से विभिन्न दिशाओं से सौभाग्य प्राप्त होता है, और कई बार ग्रहों के अशुभ प्रभाव हमें लगातार चुनौतियों का सामना करने के लिए खड़ा कर देते हैं।

ग्रह दोष दूर करने के विभिन्न तरीके ज्योतिष शास्त्र में बताए गए हैं। लेकिन इनमें से एक बेहद आसान तरीका है जगन्नाथ देव के दर्शन। शास्त्रानुसार, यदि जगन्नाथ देव के दर्शन किए जाएँ तो नवग्रह के अशुभ प्रभाव को दूर किया जा सकता है। जगन्नाथ के शरीर के विभिन्न अंगों के दर्शन से विभिन्न ग्रहों के दोष समाप्त होते हैं। आज हम जानेंगे, किस ग्रह के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए जगन्नाथ के किस अंग के दर्शन करने चाहिए।

सूर्य और चंद्रमा के अशुभ प्रभाव

ज्योतिषशास्त्र कहता है, जगन्नाथ देव की दायीं आंख दर्शन करने से जन्मकुंडली में सूर्य का अशुभ प्रभाव कट जाता है। यदि आपके कुंडली में सूर्य अशुभ स्थान पर है तो जगन्नाथ देव की दायीं आंख का दर्शन करें। इससे सूर्य की महादशा का अशुभ प्रभाव भी कम हो जाता है। साथ ही, चंद्रमा के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए जगन्नाथ की बायीं आंख का दर्शन करना चाहिए।

मंगल के अशुभ प्रभाव

वैदिक ज्योतिष के अनुसार मंगल रागी ग्रह है। इसलिए यदि जन्मकुंडली में मंगल अशुभ स्थान पर है तो जीवन अस्त-व्यस्त हो सकता है। मंगल के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए जगन्नाथ देव की नाक का दर्शन करें। नियमित रूप से यह कार्य करने से मंगल से संबंधित सभी समस्याएं दूर हो जाएंगी।

बुध के अशुभ प्रभाव

जगन्नाथ देव का मुख और होंठ दर्शन करने से बुध के अशुभ प्रभाव कट जाते हैं। यदि जन्मकुंडली में बुध कमजोर है तो जातक का ज्ञान, शिक्षा, बोध, बुद्धि कमजोर हो जाती है। इस समस्या को दूर करने के लिए जगन्नाथ देव के मुख का नियमित दर्शन करना आवश्यक है।

बृहस्पति के अशुभ प्रभाव

जगन्नाथ देव के माथे का तिलक गुरु ग्रह के दोष को दूर करने में सक्षम है। अगर गुरु कमजोर हो तो सौभाग्य नष्ट होता है और आर्थिक नुकसान होने की संभावना रहती है। इसलिए गुरु के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए जगन्नाथ देव का तिलक दर्शन करें।

शुक्र के अशुभ प्रभाव

शास्त्रों के अनुसार जगन्नाथ देव के चेहरे के चार कोने शुक्र ग्रह का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए जगन्नाथ के चेहरे के चारो ओर का दर्शन करने से शुक्र ग्रह के अशुभ प्रभाव से मुक्ति मिल सकती है। अगर जन्मकुंडली में शुक्र क्रोधित हो तो नियमित रूप से जगन्नाथ देव के चेहरे का दर्शन करना चाहिए।

शनिवार की साढ़े साती दशा

शनिवार की साढ़े साती या ढाईयां दशा अत्यंत हानिकारक होती है। इस समय जातक को विभिन्न संकटों का सामना करना पड़ता है। शनि के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए जगन्नाथ देव के कृष्ण कांति वाले शरीर का दर्शन करना चाहिए। शनि का रंग काला है और जगन्नाथ का शरीर भी काला है। इसलिए जगन्नाथ देव के शरीर का दर्शन करने से शनि के अशुभ प्रभाव से मुक्ति मिलती है।

राहु-केतु की दशा

छाया ग्रह राहु और केतु विभिन्न रूपों में जातक के जीवन में समस्याएं उत्पन्न करते हैं। इन संकटों से सुरक्षा पाने के लिए जगन्नाथ के सिर के सुनहरे मुकुट का दर्शन करें।

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