मुंबई : अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मैच से पहले भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने ऋषभ पंत को टेस्ट टीम के उपकप्तान पद से हटाए जाने के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। चयनकर्ताओं ने इस बार शुभमन गिल के डिप्टी के रूप में केएल राहुल को जिम्मेदारी सौंपी है। इस फैसले ने क्रिकेट जगत में चर्चा पैदा कर दी है, लेकिन गौतम गंभीर का मानना है कि किसी भी खिलाड़ी के लिए नेतृत्व पद से ज्यादा महत्वपूर्ण देश के लिए प्रदर्शन करना होता है।
भारत और अफगानिस्तान के बीच एकमात्र टेस्ट मुकाबला 6 जून से 10 जून तक न्यू चंडीगढ़ के महाराजा सिंह पीसीए स्टेडियम में खेला जाएगा। मैच से पहले मीडिया से बातचीत के दौरान गंभीर ने स्पष्ट किया कि किसी खिलाड़ी का अंतिम लक्ष्य कप्तान या उपकप्तान बनना नहीं होना चाहिए, बल्कि भारतीय टीम के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होना चाहिए।
देश के लिए खेलना सबसे बड़ी जिम्मेदारी
गौतम गंभीर ने कहा कि भारतीय टीम की जर्सी पहनकर मैदान पर उतरना ही किसी क्रिकेटर के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि और जिम्मेदारी होती है। उन्होंने कहा कि जब कोई खिलाड़ी पहली बार भारत के लिए खेलने का सपना देखता है, तब उसके मन में कप्तान या उपकप्तान बनने की नहीं, बल्कि देश के लिए अच्छा प्रदर्शन करने और टीम की जीत में योगदान देने की इच्छा होती है।
उन्होंने कहा, “भारत के लिए खेलना ही सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। बाकी सारी चीजें उसके बाद आती हैं। कोई खिलाड़ी जब भारतीय टीम में आता है तो वह यह नहीं सोचता कि उसे उपकप्तान बनना है। वह यह सोचता है कि वह टीम के लिए कैसे बेहतर प्रदर्शन कर सकता है और देश को जीत दिलाने में कैसे मदद कर सकता है।”
गंभीर ने आगे कहा कि कप्तान और उपकप्तान की भूमिकाएं निश्चित रूप से महत्वपूर्ण होती हैं, लेकिन अंततः हर खिलाड़ी का मूल्यांकन उसके प्रदर्शन के आधार पर ही किया जाता है। उन्होंने कहा कि यही नियम खिलाड़ियों, कोचिंग स्टाफ और टीम प्रबंधन सभी पर समान रूप से लागू होता है। चाहे मैं हूं, कोचिंग स्टाफ का कोई सदस्य हो या टीम का कोई खिलाड़ी, अंत में सबका आकलन प्रदर्शन के आधार पर ही किया जाता है। ऋषभ पंत के मामले में भी हम यही चाहते हैं कि वह अपनी स्वाभाविक शैली में खेलें और टीम के लिए योगदान दें।”
पंत को खेल बदलने की जरूरत नही
गंभीर ने यह भी साफ किया कि ऋषभ पंत को अपनी आक्रामक बल्लेबाजी शैली बदलने के लिए नहीं कहा गया है। हालांकि उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में परिस्थितियों को समझना और उसके अनुसार फैसला लेना बेहद आवश्यक होता है। हमने कभी यह नहीं कहा कि ऋषभ को अपनी बल्लेबाजी की शैली बदलनी चाहिए। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह समझना जरूरी है कि मैच किस स्थिति में है, टीम को उस समय क्या जरूरत है और किस तरह का निर्णय टीम के हित में होगा।”
मुख्य कोच ने कहा कि चाहे टेस्ट क्रिकेट हो, एकदिवसीय मुकाबला हो या टी-20 प्रारूप, किसी खिलाड़ी को उसकी स्वाभाविक शैली से पूरी तरह अलग खेलने के लिए नहीं कहा जाता। लेकिन मैच की परिस्थितियों को समझते हुए सही समय पर सही फैसला लेना उच्च स्तर के क्रिकेट का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
दक्षिण अफ्रीका टेस्ट में हुई थी आलोचना
ऋषभ पंत को हाल ही में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच के दौरान अपने शॉट चयन को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ा था। उस मुकाबले में उन्होंने टीम की मुश्किल स्थिति के दौरान एक जोखिमभरा शॉट खेलकर अपना विकेट गंवा दिया था।
उस समय भारतीय टीम की कप्तानी भी ऋषभ पंत के हाथों में थी। मैच में भारत को भारी हार का सामना करना पड़ा और टीम 408 रनों के बड़े अंतर से मुकाबला गंवा बैठी। पंत के उस फैसले पर कई पूर्व क्रिकेटरों और विशेषज्ञों ने सवाल उठाए थे।
अब जबकि अफगानिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच से पहले उन्हें उपकप्तानी की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया है, गौतम गंभीर ने स्पष्ट संकेत दिया है कि टीम प्रबंधन का ध्यान किसी पद पर नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के प्रदर्शन और टीम की सफलता पर केंद्रित है।
भारतीय टीम प्रबंधन को उम्मीद है कि ऋषभ पंत बिना किसी अतिरिक्त दबाव के अपनी स्वाभाविक शैली में बल्लेबाजी करेंगे और टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएंगे।