मुंबईः भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी मुद्रा गैर-निवासी (Bank) यानी एफसीएनआर (B) जमा के लिए शुरू की गई विशेष स्वैप सुविधा को लेकर महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि यह सुविधा केवल जमा की मूल राशि पर लागू होगी, जबकि उस पर मिलने वाला ब्याज इसमें शामिल नहीं होगा।
आरबीआई (RBI) ने मंगलवार को FCNR (B) जमा, बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ECB) और विदेशी मुद्रा में विदेशी उधारी (OFCB) से जुड़ी स्वैप सुविधा के संबंध में अक्सर पूछे जाने वाले सवालों (FAQ) के जवाब जारी किए।
क्या है RBI की स्वैप सुविधा?
केंद्रीय बैंक के अनुसार, यह एक सामान्य विदेशी मुद्रा खरीद-बिक्री (फॉरेक्स स्वैप) व्यवस्था है। इसके तहत बैंकों द्वारा जुटाई गई पात्र FCNR (B) जमा राशि के बदले आरबीआई विदेशी मुद्रा और रुपये के बीच स्वैप सुविधा उपलब्ध कराएगा। हालांकि यह सुविधा केवल जमा की मूल राशि तक सीमित रहेगी और ब्याज को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा।
आरबीआई (RBI) ने यह भी स्पष्ट किया कि बैंक एफसीएनआर (बी) खाताधारकों को ऋण दे सकते हैं और ऐसी जमा राशियों पर लियन भी दर्ज कर सकते हैं।
विदेशी पूंजी लाने की कोशिश
गौरतलब है कि 8 जून को आरबीआई ने अमेरिकी डॉलर-रुपया विशेष फॉरेक्स स्वैप योजना शुरू की थी। इसका मकसद बैंकों को नए FCNR (B) जमा जुटाने के लिए प्रोत्साहित करना और देश में विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाना है।
इस योजना के तहत बैंक तीन से पांच वर्ष की अवधि वाली FCNR (B)जमा पर अधिक आकर्षक ब्याज दरें भी दे सकते हैं। एफसीएनआर (बी) खाते खास तौर पर अनिवासी भारतीयों (NRI) के लिए होते हैं, जिनमें वे विदेशी मुद्रा में जमा रख सकते हैं और रुपये की कमजोरी के जोखिम से भी बचाव कर सकते हैं।
तीन साल से कम अवधि के लिए भी मिलेगी सुविधा
आरबीआई ने कहा कि बैंक तीन वर्ष से कम अवधि के लिए भी स्वैप कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए जरूरी होगा कि संबंधित FCNR (B) जमा की मूल अवधि कम से कम तीन वर्ष हो और वह योजना की शर्तों को पूरा करती हो।
इसके अलावा बैंकों को अलग-अलग ग्राहकों या जमा श्रेणियों के लिए अलग-अलग ब्याज दरें देने की भी अनुमति दी गई है।
सार्वजनिक उपक्रमों को भी मिलेगा लाभ
केंद्रीय बैंक ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (PSU) द्वारा ली जाने वाली बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ECB) के लिए भी अमेरिकी डॉलर-रुपया स्वैप सुविधा शुरू की है। यह सुविधा उन उधारियों पर लागू होगी जिनकी औसत परिपक्वता अवधि तीन वर्ष या उससे अधिक है।
आरबीआई के अनुसार स्वैप की अवधि ऋण की पुनर्भुगतान अवधि के अनुरूप होगी, लेकिन इसकी अधिकतम सीमा पांच वर्ष तक रहेगी। आरबीआई ने अधिकृत डीलर श्रेणी-1 बैंकों द्वारा जुटाई गई विदेशी मुद्रा उधारी (OFCB) को भी इस योजना में शामिल किया है। इसके लिए न्यूनतम परिपक्वता अवधि तीन वर्ष निर्धारित की गई है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?
विशेषज्ञों के अनुसार इस योजना से बैंकों के लिए विदेशी मुद्रा जमा जुटाना आसान होगा। साथ ही देश में विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ाने, डॉलर संसाधन उपलब्ध कराने और वित्तीय प्रणाली को अतिरिक्त तरलता देने में मदद मिल सकती है।
आरबीआई का मानना है कि स्वैप सुविधा और ब्याज दरों में लचीलापन मिलने से बैंक अधिक एनआरआई जमा आकर्षित कर पाएंगे, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार को भी मजबूती मिल सकती है।