🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

कोलकाता में बदले जाएंगे मुगल-पठान नाम? सड़कों के नाम पर सियासी संग्राम

सुरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलने पर विधानसभा में गरमाई बहस, कार्तिक महाराज की अध्यक्षता में बनेगी नामकरण और मूल्यांकन समिति।

कोलकाताः कोलकाता में सड़कों और सार्वजनिक स्थलों के नामकरण को लेकर नई राजनीतिक बहस छिड़ गई है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा में स्पष्ट संकेत दिया कि शहर में मुगल और पठान शासकों के नाम पर मौजूद सड़कों और स्थलों के नामों की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सिस्टर निवेदिता को छोड़कर किसी भी विदेशी व्यक्ति के नाम पर सड़क या सार्वजनिक स्थान का नाम रखने से पहले गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

यह विवाद तब और तेज हो गया जब पार्क सर्कस स्थित सुरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रोड किए जाने का फैसला सामने आया। इस मुद्दे पर विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस की बागी विधायक सबीना यास्मीन ने सरकार के निर्णय पर सवाल उठाए।

ऋतब्रत बनर्जी ने तर्क दिया कि गोपाल मुखर्जी के नाम पर सड़क का नामकरण उनके कार्यक्षेत्र बऊबाजार इलाके में किया जाना अधिक उपयुक्त होता। वहीं सबीना यास्मीन ने कहा कि शिक्षाविद और कलकत्ता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. हसन सुरावर्दी तथा अविभाजित बंगाल के अंतिम प्रीमियर हुसैन शहीद सुरावर्दी दो अलग-अलग व्यक्तित्व थे, इसलिए नाम परिवर्तन का आधार स्पष्ट होना चाहिए।

बहस का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि जब उन्होंने संबंधित सड़क पर सुरावर्दी का नाम देखा तो उन्हें यह उचित नहीं लगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी सच्चे राष्ट्रवादी और देशभक्त व्यक्तित्व, जैसे पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को सम्मानित करना हो तो उस पर विचार किया जा सकता है, लेकिन सुरावर्दी के नाम को बनाए रखने का औचित्य समझ से परे है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि कोलकाता की पहचान ऐसे नामों से जुड़नी चाहिए जो देश की सकारात्मक विरासत को दर्शाएं। उन्होंने ग्रेट कलकत्ता किलिंग, नोआखली दंगों और औपनिवेशिक दौर से जुड़े विवादित व्यक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि शहर में मुगल-पठान शासकों या विदेशी व्यक्तियों के नामों को लेकर पुनर्विचार होना चाहिए।

इस बीच, कोलकाता के पूर्व मेयर और वरिष्ठ वामपंथी नेता विकास भट्टाचार्य ने नाम परिवर्तन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि पहले किसी सड़क का नाम बदलने से पहले विशेषज्ञों की राय ली जाती थी और नामकरण समिति की अनुशंसा के बाद ही अंतिम निर्णय होता था। उनके अनुसार, वर्तमान व्यवस्था में यह संस्थागत प्रक्रिया कमजोर पड़ गई है।

पूर्व मेयर फिरहाद हकीम के इस्तीफे के बाद कोलकाता नगर निगम के अंतर्गत कई समितियां निष्क्रिय हो गई थीं, जिनमें नामकरण समिति भी शामिल थी। नगर निगम आयुक्त स्मिता पांडे ने पुष्टि की कि सुरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रोड कर दिया गया है।

विवाद के बीच मुख्यमंत्री ने एक नई नामकरण एवं मूल्यांकन समिति के गठन की घोषणा की। उन्होंने बताया कि पद्मश्री स्वामी प्रदीप्तानंद (कार्तिक) महाराज इसकी अध्यक्षता करेंगे। शहर में सड़कों, स्थलों और सार्वजनिक परिसंपत्तियों के नामकरण अथवा नाम परिवर्तन से जुड़े सभी प्रस्ताव इसी समिति के पास भेजे जाएंगे।

विधानसभा में इस मुद्दे पर राजनीतिक तल्खी भी देखने को मिली। मुख्यमंत्री ने विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी की आलोचना करते हुए कहा कि उनका भाषण वामपंथी विचारधारा से प्रभावित प्रतीत होता है। उन्होंने वामपंथी दलों पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस और रवीन्द्रनाथ ठाकुर को लेकर अतीत में विवादित टिप्पणियां करने का आरोप भी लगाया।

मुख्यमंत्री की विदेशी नामों पर पुनर्विचार संबंधी टिप्पणी के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि भविष्य में लेनिन सरणी और होची मिन्ह सरणी जैसे नामों की भी समीक्षा हो सकती है। हालांकि सरकार की ओर से इस संबंध में अभी कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन नई समिति के गठन ने इस बहस को और तेज कर दिया है।

Articles you may like: