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Bihar Encounter Row: भारत भूषण तिवारी मामले में पुलिस अधिकारियों पर केस

आत्मसमर्पण के बाद गोली मारने के आरोपों की होगी जांच होगी। न्यायिक जांच पहले से जारी है।

By डॉ. अभिज्ञात

Jun 24, 2026 12:51 IST

पटनाः बिहार के भोजपुर जिले में चर्चित भारत भूषण तिवारी कथित मुठभेड़ मामले में महत्वपूर्ण मोड़ आया है। बिहार पुलिस ने जगदीशपुर के डीएसपी, शाहपुर थाना प्रभारी (एसएचओ) और अभियान में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। यह कार्रवाई भारत भूषण तिवारी की मां द्वारा की गई शिकायत के आधार पर की गई है, जिसमें उनके बेटे की कथित रूप से गलत तरीके से हत्या किए जाने का आरोप लगाया गया है।

मां की शिकायत पर शाहपुर थाने में दर्ज हुई प्राथमिकी

पुलिस अधिकारियों के अनुसार भारत भूषण तिवारी की मां ने भोजपुर के पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उनके बेटे ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने की सहमति दे दी थी लेकिन इसके बावजूद उसे गड्ढे में फेंककर गोली मार दी गई। शिकायत के आधार पर शाहपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। अब मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

आत्मसमर्पण के बाद गोली मारने का आरोप

भारत भूषण तिवारी की मां ने अपनी शिकायत में कहा कि पुलिसकर्मियों ने उनके बेटे से अपने साथ चलने को कहा था और ऐसा नहीं करने पर उसे जबरन बांधकर ले जाने की चेतावनी दी थी। उनके अनुसार इसके बाद भारत भूषण तिवारी ने आत्मसमर्पण करने का निर्णय लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बेटे ने अपना हथियार नीचे फेंक दिया और हाथ जमीन पर रख दिए। इसके बावजूद पुलिसकर्मियों ने उसे पकड़ लिया, एक गड्ढे में फेंका और मौके पर मौजूद जगदीशपुर डीएसपी के आदेश पर कई गोलियां चलाईं। मां का दावा है कि भारत भूषण तिवारी को पांच गोलियां लगीं, जिसके बाद उसे वाहन में डालकर ले जाया गया।

पिता को भी हिरासत में रखने का आरोप

शिकायत में यह भी कहा गया है कि घटना के बाद उनके पति को शाहपुर थाने ले जाया गया और शाम से देर रात तक वहां रोके रखा गया। बाद में पुलिस ने परिवार को सूचना दी कि उनके बेटे की मृत्यु हो गई है।

राज्य सरकार न्याय सुनिश्चित करेगी : जदयू

जनता दल (यूनाइटेड) के नेता अमरेंद्र कुमार पांडेय ने कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि भारत भूषण तिवारी को न्याय मिले। उन्होंने कहा कि सरकार मामले की निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति प्रतिबद्ध है।

अधिवक्ता वर्षा सिंह ने उठाए कानूनी सवाल

अधिवक्ता वर्षा सिंह ने कहा कि भारतीय कानून में एनकाउंटर जैसी कोई कानूनी परिभाषा नहीं है। उन्होंने कहा कि पुलिस को केवल उन्हीं परिस्थितियों में हथियार इस्तेमाल करने की अनुमति है जब उसकी जान को तत्काल खतरा हो या किसी गंभीर अपराधी को पकड़ने का कोई दूसरा विकल्प न बचा हो। उन्होंने कहा कि इस मामले में ऐसी परिस्थितियां दिखाई नहीं देतीं। वर्षा सिंह ने सर्वोच्च न्यायालय के उस निर्णय का भी उल्लेख किया जिसमें मुठभेड़ में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर स्वतंत्र एजेंसी से जांच और प्राथमिकी दर्ज करने का प्रावधान बताया गया है।

कौन थे भारत भूषण तिवारी

28 वर्षीय भारत भूषण तिवारी बिहार के भोजपुर जिले के बिलौती गांव के निवासी थे। वे छात्र होने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी पहचाने जाते थे। वे विशेष रूप से जवनिया गांव में बाढ़ प्रभावित लोगों के पुनर्वास से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे थे और स्थानीय प्रशासन की कथित विफलताओं तथा भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते थे।

सोशल मीडिया पोस्ट के बाद बढ़ा विवाद

बताया गया कि सरकारी अधिकारियों के प्रति नाराजगी के चलते भारत भूषण तिवारी ने फेसबुक पर कुछ वीडियो साझा किए थे। इन वीडियो में उन्होंने एक अवैध हथियार दिखाया था और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ धमकी भरे बयान दिए थे। इसके बाद स्थानीय पुलिस ने उनके घर को घेर लिया।

पुलिस ने मानसिक रूप से अस्थिर होने का किया था दावा

16 जून 2026 को भोजपुर पुलिस ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा था कि भारत भूषण तिवारी मानसिक रूप से अस्थिर हैं। पुलिस का कहना था कि उनका उद्देश्य उन्हें निःशस्त्र कर उपचार के लिए मानसिक स्वास्थ्य संस्थान भेजना था।

17 जून को हुई गोलीबारी, उपचार के दौरान हुई मौत

17 जून को विशेष कार्य बल (एसटीएफ) और स्थानीय पुलिस के साथ गतिरोध के दौरान भारत भूषण तिवारी को गोली लगी। बाद में उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। मामले को लेकर दो अलग-अलग दावे सामने आए हैं।

पुलिस और परिवार के दावे आमने-सामने

भोजपुर पुलिस का कहना है कि भारत भूषण तिवारी ने अवैध पिस्तौल से पुलिस दल पर लगातार 8 से 10 गोलियां चलाईं, जिसके बाद एसटीएफ के जवानों ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की। वहीं गोलीबारी से ठीक पहले फेसबुक लाइव पर प्रसारित एक वीडियो में भारत भूषण तिवारी खुले मैदान में दिखाई देते हैं। वीडियो में उन्हें कैमरे से बात करते हुए और अपनी पिस्तौल पुलिस की ओर फेंकते हुए देखा गया। परिवार और स्थानीय लोगों का आरोप है कि आत्मसमर्पण के बाद निहत्थे व्यक्ति को गोली मारी गई।

राजनीतिक और कानूनी संकट में बदला मामला

यह मामला अब बिहार में बड़ा राजनीतिक और कानूनी मुद्दा बन चुका है। घटना के बाद सार्वजनिक आक्रोश और बढ़ते राजनीतिक दबाव को देखते हुए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायाधीश की अगुवाई में स्वतंत्र न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। प्रशासन ने जांच पूरी होने तक स्थानीय थाना प्रभारी सहित चार पुलिस अधिकारियों को निलंबित भी कर दिया है।

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