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न्यूजीलैंड क्रिकेट के दिग्गज गेंदबाज बॉब ब्लेयर का निधन, 94 साल की उम्र में खत्म हुआ शानदार सफर

टांगिवाई हादसे के बाद जोहान्सबर्ग टेस्ट की ऐतिहासिक पारी ने बनाया था उन्हें क्रिकेट का प्रेरणादायक चेहरा।

By शिखा सिंह

Jun 24, 2026 16:57 IST

वेलिंगटन : न्यूजीलैंड क्रिकेट के पूर्व तेज गेंदबाज बॉब ब्लेयर का निधन हो गया है। उन्होंने अपने 94वें जन्मदिन के दिन अंतिम सांस ली। बॉब ब्लेयर न सिर्फ अपनी गेंदबाजी के लिए याद किए जाते हैं, बल्कि 1953 की एक दर्दनाक घटना के बाद उनके अदम्य साहस और खेल भावना की कहानी क्रिकेट इतिहास की सबसे प्रेरणादायक घटनाओं में शामिल है।

बॉब ब्लेयर ने न्यूजीलैंड के लिए 1953 से 1964 के बीच 19 टेस्ट मैच खेले। उन्होंने अपने टेस्ट करियर में 43 विकेट हासिल किए और उनका गेंदबाजी औसत 35.23 रहा। हालांकि गेंद से उनका प्रदर्शन शानदार था, लेकिन उनके करियर की सबसे बड़ी पहचान एक ऐसे पल से जुड़ी है, जिसने उन्हें क्रिकेट जगत में अमर बना दिया।

दिसंबर 1953 में दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में खेले गए टेस्ट मैच के दौरान बॉब ब्लेयर ने निजी दुख के बावजूद मैदान पर उतरकर जिस साहस का परिचय दिया, उसकी मिसाल आज भी दी जाती है।

क्रिसमस की पूर्व संध्या पर 1953 में न्यूजीलैंड में टांगिवाई रेल हादसा हुआ था। वेलिंगटन से ऑकलैंड जा रही एक्सप्रेस ट्रेन रेलवे पुल टूटने के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस हादसे में 151 लोगों की मौत हुई थी। मृतकों में बॉब ब्लेयर की मंगेतर नेरिसा लव भी शामिल थीं।

इस दुखद घटना के सिर्फ दो दिन बाद जोहान्सबर्ग टेस्ट में न्यूजीलैंड की टीम दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेल रही थी। बॉब ब्लेयर टीम होटल में शोक में थे, जबकि टीम बल्लेबाजी कर रही थी। जब न्यूजीलैंड का नौवां विकेट गिरा तो सभी को लगा कि पारी समाप्त हो गई है।

लेकिन तभी एक भावुक और यादगार पल देखने को मिला। बॉब ब्लेयर होटल से निकलकर मैदान पर पहुंचे और बल्लेबाजी के लिए क्रीज पर उतरे। उन्होंने बर्ट सटक्लिफ का साथ दिया, जो इससे पहले दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाज नील एडॉक के बाउंसर से गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद बल्लेबाजी के लिए लौटे थे।

दोनों बल्लेबाजों ने आखिरी विकेट के लिए 33 रन की साहसिक साझेदारी की। बॉब ब्लेयर ने 6 रन बनाए और स्टंप आउट हुए, जबकि बर्ट सटक्लिफ 80 रन बनाकर नाबाद रहे। यह पारी टेस्ट क्रिकेट इतिहास की सबसे बहादुर पारियों में से एक मानी जाती है। ब्लेयर का मैदान पर उतरना कठिन परिस्थितियों में हिम्मत, प्रतिबद्धता और खेल भावना का प्रतीक बन गया।

बॉब ब्लेयर की इस ऐतिहासिक कहानी को आज भी याद किया जाता है। न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के बीच टेस्ट सीरीज के विजेता को दी जाने वाली टांगिवाई शील्ड इसी घटना की याद में शुरू की गई। 2024 में शुरू हुई यह ट्रॉफी दोनों देशों के बीच 1953 में बने भावनात्मक संबंध को सम्मान देती है।

न्यूजीलैंड क्रिकेट के अंतरिम मुख्य कार्यकारी अधिकारी ग्राहम पार्क्स ने बॉब ब्लेयर को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनकी कहानी दोनों देशों के क्रिकेट इतिहास में अमिट छाप छोड़ गई है। उन्होंने कहा कि ब्लेयर का साहस और खेल भावना उस भावना को दर्शाता है, जो खेल को खास बनाती है।

बॉब ब्लेयर का प्रथम श्रेणी क्रिकेट करियर भी बेहद शानदार रहा। उन्होंने 119 मैचों में 537 विकेट हासिल किए। उनका औसत 18.54 रहा। उन्होंने ज्यादातर मुकाबले वेलिंगटन टीम के लिए खेले।

1964 में क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद बॉब ब्लेयर ने कोच के रूप में भी योगदान दिया। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया, जिम्बाब्वे, दक्षिण अफ्रीका, उत्तरी आयरलैंड और इंग्लैंड में कोचिंग की। बाद में वह अपनी पत्नी बारबरा के साथ चेशायर में रहने लगे।

बॉब ब्लेयर के सम्मान में न्यूजीलैंड की टीम ब्लैक कैप्स इंग्लैंड के खिलाफ नॉटिंघम में होने वाले तीसरे टेस्ट के पहले दिन काली पट्टी बांधकर मैदान पर उतरेगी।

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