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महाराष्ट्र की राजनीति में नया मोड़, शिंदे गुट बनाम ठाकरे गुट आमने-सामने

महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल: शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के दल बदलने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ने बुलाई बैठक।

By रजनीश प्रसाद

Jun 24, 2026 14:08 IST

नई दिल्ली : शिवसेना (यूबीटी) के छह लोकसभा सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। घटनाक्रम के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार शाम पांच बजे पार्टी नेताओं की बैठक बुलाई है। इस बैठक में दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलें रखेंगे।

सूत्रों के अनुसार शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत और अनिल देसाई लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर बागी सांसदों से जुड़े घटनाक्रम पर अपना पक्ष रखेंगे। ठाकरे गुट का प्रयास रहेगा कि बागी सांसदों के समूह को अलग संसदीय गुट के रूप में मान्यता न दी जाए।

यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब सोमवार को शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसद - संजय हरिभाऊ जाधव, भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे, ओमप्रकाश भूपालसिंह निम्बालकर, संजय दीना पाटिल, संजय उत्तमराव देशमुख और नागेश बापुराव पाटिल अष्टीकर ने औपचारिक रूप से उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया। इस घटनाक्रम को पार्टी के भीतर "ऑपरेशन टाइगर" की सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

दूसरी ओर शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने इसे महाराष्ट्र के साथ विश्वासघात बताते हुए बागियों के खिलाफ संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि महाराष्ट्र के गद्दारों के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी और उनका हौसला बुलंद है।

शिवसेना (यूबीटी) के विधायक आदित्य ठाकरे ने भी एकनाथ शिंदे पर तीखा हमला जारी रखा। उन्होंने अपने राजनीतिक बयान में शिंदे को लेकर कटाक्ष करते हुए आलोचना की।

उधर दल बदलने वाले सांसदों ने संसाधनों और फंड की कमी को अपने फैसले का प्रमुख कारण बताया है। वहीं शिंदे गुट के सांसद नरेश म्हास्के ने शिवसेना (यूबीटी) की गिरती स्थिति के लिए संजय राउत को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व और जनविश्वास के कारण लगातार जनप्रतिनिधि शिवसेना में शामिल हो रहे हैं।

म्हास्के ने दावा किया कि अभी छह सांसद शामिल हुए हैं और आने वाले समय में अन्य नेता भी शिंदे गुट का रुख कर सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संजय राउत पार्टी पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं जिससे कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों में असंतोष बढ़ा है। उनके अनुसार पर्याप्त राजनीतिक समर्थन नहीं मिलने के कारण कई जनप्रतिनिधि नया रास्ता चुन रहे हैं।

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