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वायरल वीडियो मामला: भगवंत मान बोले- 'वीडियो फर्जी, मुझे बदनाम करने के लिए धर्म का इस्तेमाल कर रहा विपक्ष’

फोरेंसिक रिपोर्ट और पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल, भाजपा, कांग्रेस और अकाली दल पर साधा निशाना।

By डॉ. अभिज्ञात

Jun 24, 2026 16:07 IST

चंडीगढ़ः पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कथित वायरल वीडियो विवाद को लेकर विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ प्रसारित किया गया वीडियो पूरी तरह फर्जी है और उन्हें राजनीतिक रूप से बदनाम करने के लिए धर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल मिलकर उनके खिलाफ अभियान चला रहे हैं।


वीडियो को बताया पूरी तरह फर्जी

सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी एक वीडियो संदेश में भगवंत मान ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से उनकी फर्जी वीडियो प्रसारित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि वीडियो में दिखाई देने वाले व्यक्ति की न तो उनकी शारीरिक बनावट से समानता है और न ही उसकी चाल-ढाल और खड़े होने का तरीका उनसे मेल खाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें वीडियो वायरल कराने का दोषी बताया जा रहा है, जबकि लोगों ने स्वयं वीडियो देखकर इसकी सत्यता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि वीडियो की जांच फोरेंसिक प्रयोगशालाओं से भी कराई गई थी।


विपक्ष पर धर्म के नाम पर राजनीति करने का आरोप

भगवंत मान ने कहा कि जब राजनीतिक विरोधियों को उन्हें घेरने का कोई दूसरा रास्ता नहीं मिलता, तब वे धर्म का सहारा लेते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष उन्हें बदनाम करने के लिए धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने कहा कि जनता अच्छी तरह समझती है कि कौन सच बोल रहा है और कौन झूठ फैला रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह अंतिम फैसला जनता पर छोड़ते हैं।


फोरेंसिक लैब संचालकों पर दबाव डालने का आरोप

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि भाजपा ने उन फोरेंसिक प्रयोगशालाओं के संचालकों पर दबाव बनाया है, जहां वीडियो की जांच कराई गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्राथमिकी और कथित उत्पीड़न के डर से प्रयोगशाला संचालकों से यह कहलवाया जा रहा है कि उन्होंने पैसे लेकर फर्जी रिपोर्ट तैयार की थी। मान ने सवाल उठाते हुए कहा कि जिस प्रयोगशाला से उनकी ओर से जांच कराई गई, उसे फर्जी बताया जा रहा है, जबकि दूसरी जांच को सही बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनता स्वयं तय करेगी कि सच्चाई क्या है।


विकास कार्य जारी रखने का दावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्षी दलों के आरोपों के बावजूद वह राज्य में बिजली, आवास, अस्पताल और रोजगार से जुड़े कार्यों की गति बनाए रखेंगे। उन्होंने कहा कि राजनीतिक हमलों से उनका ध्यान जनहित के कामों से नहीं हटेगा।


गुरुग्राम पुलिस ने दर्ज किया मामला

यह बयान ऐसे समय आया है जब गुरुग्राम पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को हिरासत में लेकर प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस का आरोप है कि इन व्यक्तियों ने कथित रूप से फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार की और उसे प्रसारित किया।


दो अभिुयक्तों को हिरासत में लिया गया

गुरुग्राम के अपराध शाखा के सहायक पुलिस आयुक्त नवीन शर्मा ने मंगलवार को बताया कि पुलिस को इस संबंध में शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसके बाद दो लोगों को हिरासत में लिया गया। उन्होंने बताया कि एक अभियुक्त की पहचान अंकित के रूप में हुई है, जो राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के साथ अनुबंध के आधार पर साइबर विशेषज्ञ के रूप में कार्य करता था। दूसरे व्यक्ति का नाम अरुण बताया गया है।


सरकारी मान्यता प्राप्त लैब से नहीं जुड़े थे अभियुक्त : पुलिस

सहायक पुलिस आयुक्त नवीन शर्मा के अनुसार प्रारंभिक जांच में पता चला है कि अभियुक्तों का किसी सरकारी मान्यता प्राप्त फोरेंसिक प्रयोगशाला से संबंध नहीं था। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने पड़ोसी राज्य के मुख्यमंत्री से जुड़ा एक वीडियो तैयार कर उसे प्रसारित किया। उन्होंने कहा कि मामले की जांच जारी है और आगे जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनकी पुष्टि फोरेंसिक विशेषज्ञों की सहायता से की जाएगी।


10 लाख रुपये मिलने का दावा

पुलिस अधिकारी ने कहा कि पूछताछ के दौरान अभियुक्तों ने दावा किया है कि उन्हें यह काम करने के लिए 10 लाख रुपये दिए गए थे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पड़ोसी राज्य के कुछ अधिकारी भी कथित रूप से इस मामले में शामिल हो सकते हैं। हालांकि पुलिस ने कहा कि इन दावों की जांच अभी जारी है और सभी तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है।


विवाद का राजनीतिक असर बढ़ा

वायरल वीडियो, फोरेंसिक रिपोर्ट, पुलिस जांच और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के कारण यह मामला पंजाब की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन गया है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और उसके निष्कर्ष इस विवाद की आगे की तस्वीर तय कर सकते हैं।

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