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तृणमूल के दो गुट आमने-सामने, अग्निमित्रा पॉल बोलीं- इतनी जल्दी बिखर गई पार्टी

ऋतब्रत बनर्जी गुट और ममता बनर्जी खेमे के बीच वर्चस्व की लड़ाई, चुनाव आयोग तक पहुंचा विवाद।

By श्वेता सिंह

Jun 24, 2026 16:25 IST

कोलकाताः पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी के दो गुटों के बीच ‘असली तृणमूल कांग्रेस’ होने का दावा किए जाने के बीच राज्य की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति ऐसी हो गई है कि यह समझना मुश्किल है कि असली तृणमूल कांग्रेस आखिर है कौन।

कोलकाता में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि एक धड़ा सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहा है, जबकि दूसरा सरकार के फैसलों का समर्थन करता दिखाई दे रहा है। उन्होंने दावा किया कि जिस पार्टी को अपने जनाधार और राजनीतिक ताकत पर बेहद भरोसा था, वह अब आंतरिक संघर्ष से कमजोर हो चुकी है।

उधर, तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद सौगत राय ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को पार्टी की आधिकारिक पहचान देने का विरोध किया। उनका कहना है कि तृणमूल कांग्रेस एक ही है और उसकी अध्यक्ष ममता बनर्जी हैं। उन्होंने कहा कि केवल विधायकों की संख्या के आधार पर किसी गुट को पार्टी की वास्तविक पहचान नहीं दी जा सकती।

इस बीच, विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने मंगलवार को अपने समर्थक नेताओं के साथ पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात की। उनके साथ विद्रोही गुट के अध्यक्ष अरूप राय, मुख्य सचेतक अखरुज्जमान, उपनेता जावेद अहमद खान और संदीपम साहा भी मौजूद थे। मुलाकात के बाद ऋतब्रत ने कहा कि चुनाव चिह्न को लेकर कोई विवाद नहीं है और उनका गुट ही वास्तविक तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करता है।

ऋतब्रत खेमे का दावा है कि उसे पार्टी के 80 विधायकों में से कम से कम 58 का समर्थन प्राप्त है। इसी गुट ने अरूप राय को नया अध्यक्ष घोषित किया है और 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति के गठन का भी ऐलान किया है। साथ ही यह प्रस्ताव रखा गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पार्टी में मार्गदर्शक की भूमिका निभाती रहें।

नई कार्यकारिणी में फिरहाद हकीम, अरूप विश्वास, रथीन घोष, सबीना यास्मीन, जावेद खान और संदीपम साहा सहित कई नेताओं को शामिल किया गया है। इनमें फिरहाद हकीम, अरूप विश्वास, रथीन घोष और सबीना यास्मीन को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

दूसरी ओर, ममता बनर्जी ने भी संगठनात्मक नियंत्रण बनाए रखने के लिए तेजी से कदम उठाए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग को पार्टी पदाधिकारियों की आधिकारिक सूची सौंपते हुए स्वयं को तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष के रूप में दर्ज कराया है। ऐसे में पार्टी की वैध पहचान और नेतृत्व को लेकर सियासी टकराव आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

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