नई दिल्ली/लखनऊः उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में एक फैक्टरी से बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराए जाने के मामले ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस घटना को मानव गरिमा पर सीधा हमला बताया है। उन्होंने पीड़ित मजदूरों को न्याय, पुनर्वास और आरोपियों को कठोरतम सजा दिए जाने की मांग की है।
मजदूरों पर अत्याचार को बताया बेहद भयावह
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच X पर हिंदी में पोस्ट करते हुए कहा कि मुजफ्फरनगर में मजदूरों के साथ बंधुआ श्रम का मामला बेहद चौंकाने वाला और दर्दनाक है। मजदूरों से बिना वेतन काम करवाने के अलावा उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। आरोप है कि उन्हें कुत्तों से कटवाया गया, भालों से घायल किया गया, कोड़े मारे गए और पशुओं का चारा तक खाने के लिए मजबूर किया गया। राहुल ने कहा कि यह केवल अपराध नहीं, बल्कि मानव गरिमा पर हमला है और दोषियों को सबसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
आर्थिक हालात पर भी उठाए सवाल
कांग्रेस नेता ने कहा कि यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि कमजोर होती अर्थव्यवस्था की तस्वीर भी दिखाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर मजदूर ऐसी खतरनाक परिस्थितियों में फंसने को मजबूर क्यों हो जाते हैं। राहुल ने कहा कि जब रोजगार के अवसर कम हो जाते हैं, आय रुक जाती है और मनरेगा तथा श्रम कानून जैसे सुरक्षा तंत्र कमजोर पड़ जाते हैं, तब मजबूरी बढ़ती है। जिन लोगों के पास रोजगार, सुरक्षा और विकल्प नहीं होते, वे ऐसे शोषण का आसान शिकार बन जाते हैं।
छापेमारी में मुक्त कराए गए 12 बंधुआ मजदूर
सोमवार को पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई के दौरान मुजफ्फरनगर जिले के मंडी गांव स्थित एक पेपर प्लेट निर्माण फैक्टरी में छापेमारी की गई थी। फैक्टरी से नाबालिगों सहित 12 बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराया गया। मजदूरों के शरीर पर चोट और कथित यातना के स्पष्ट निशान पाए गए थे।
गुप्त सूचना के बाद हुई कार्रवाई
मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार ने बताया कि गुप्त सूचना मिलने के बाद कार्यपालक मजिस्ट्रेट राधे श्याम गौर के नेतृत्व में एक टीम ने तितावी थाना क्षेत्र के मंडी गांव स्थित फैक्टरी पर छापा मारा। कार्रवाई के दौरान फैक्टरी परिसर से 12 मजदूरों को मुक्त कराया गया।
अमानवीय परिस्थितियों में रखे जाने का आरोप
अधिकारियों के अनुसार मजदूरों को बेहद खराब और अमानवीय परिस्थितियों में रखा गया था। उन्हें हर महीने 12,000 रुपये वेतन देने का वादा करके विभिन्न राज्यों से लाया गया था। हालांकि पुलिस जांच में सामने आया कि उन्हें वादा किया गया वेतन नहीं दिया गया। मजदूरों को केवल भोजन उपलब्ध कराया जाता था और उनसे जबरन काम करवाया जाता था।
फैक्टरी मालिक समेत तीन लोगों पर मामला दर्ज
पुलिस ने फैक्टरी मालिक अंकित बालियान, प्रदीप बालियान और शिवा त्यागी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, बंधुआ मजदूरी प्रथा (उन्मूलन) अधिनियम और बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
दो अभियुक्त गिरफ्तार, मालिक फरार
पुलिस ने प्रदीप बालियान और शिवा त्यागी को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं फैक्टरी मालिक अंकित बालियान अभी फरार बताया जा रहा है और उसकी तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है और मजदूरों के साथ हुए कथित अत्याचारों के सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।