वाशिंगटन : भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत में काफी प्रगति हुई है, लेकिन अंतिम सहमति तक पहुंचने से पहले कई अहम मुद्दों का समाधान होना बाकी है। एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट (एएसपीआई) के विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ी है, लेकिन कुछ प्रमुख मतभेद अभी भी समझौते की राह में चुनौती बने हुए हैं।
यह बयान अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीयर की नई दिल्ली में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के साथ 23 और 24 जून को हुई दो दिवसीय बैठक के बाद सामने आया है। विशेषज्ञों के अनुसार दोनों पक्षों ने व्यापार वार्ता में महत्वपूर्ण प्रगति की है, लेकिन अंतिम समझौते के लिए कुछ संवेदनशील मुद्दों पर सहमति बनना जरूरी है।
एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट की वरिष्ठ उपाध्यक्ष वेंडी कटलर ने कहा कि हाल की बैठकों में काफी प्रगति हुई है, लेकिन भारत के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना अभी भी आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की अपनी-अपनी प्राथमिकताएं और सीमाएं हैं, जो समझौते को पूरा करने में बाधा बन रही हैं।
वेंडी कटलर ने यह भी कहा कि पिछले एक साल में हुए कुछ घटनाक्रमों के कारण नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच भरोसे की कमी बढ़ी है, जिससे बातचीत को अंतिम चरण तक पहुंचाना और जटिल हो गया है।
उन्होंने बताया कि भारत किसी भी समझौते को अंतिम रूप देने से पहले टैरिफ व्यवस्था को लेकर स्पष्टता चाहता है। भारत की कोशिश है कि उसे प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर टैरिफ लाभ मिले। इसके अलावा नई दिल्ली अमेरिका से यह आश्वासन भी चाहती है कि भविष्य में अतिरिक्त टैरिफ नहीं बढ़ाए जाएंगे। हालांकि कटलर के अनुसार अमेरिका की वर्तमान नीति को देखते हुए यह मांग पूरी करना मुश्किल हो सकता है।
उन्होंने कहा कि व्यापार समझौते के करीब पहुंचना सकारात्मक संकेत है, लेकिन आमतौर पर बातचीत का अंतिम चरण सबसे कठिन होता है। इसलिए आने वाले समय में दोनों देशों के वार्ताकारों के बीच और दौर की बातचीत होने की संभावना है।
एएसपीआई की दक्षिण एशिया पहल की निदेशक फरवा आमेर ने भी कहा कि दोनों सरकारों की लगातार कोशिशें समझौते की संभावना को मजबूत करती हैं, लेकिन रास्ते में अभी कई चुनौतियां और अनिश्चितताएं मौजूद हैं।
फरवा आमेर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापक भू-राजनीतिक मतभेदों का असर भी व्यापार वार्ता पर पड़ा है। उनके अनुसार भारत बातचीत की मेज पर सहयोगी रुख के साथ-साथ अपनी स्थिति को लेकर अधिक दृढ़ता भी दिखा रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय नेतृत्व पर घरेलू स्तर पर भी दबाव है कि वह ऐसा संतुलित और निष्पक्ष समझौता करे, जिससे देश के हित सुरक्षित रहें।
उन्होंने कहा कि यदि बातचीत सफल रहती है और तय समयसीमा के भीतर अंतरिम समझौता होता है तो इससे भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूती मिलेगी। इससे दोनों देशों के बीच अन्य क्षेत्रों में सहयोग को भी गति मिल सकती है। उन्होंने कहा कि व्यापक व्यापार समझौते से दोनों देशों को लाभ होगा।
फरवा आमेर ने भारत की व्यापार साझेदारी को बढ़ाने की रणनीति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत समानांतर रूप से अन्य व्यापारिक साझेदारों के साथ भी संबंध मजबूत कर रहा है। अमेरिका की व्यापार नीतियों ने भारत को अपने व्यापार विकल्पों में विविधता लाने के लिए और तेजी से कदम उठाने के लिए प्रेरित किया है।
उन्होंने कहा कि भारत अब अपने व्यापार पोर्टफोलियो को विस्तार देने पर ध्यान दे रहा है, ताकि किसी एक बाजार पर निर्भरता कम की जा सके और संभावित जोखिमों को घटाया जा सके।