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अमेरिका ने अंतिम समझौते में शिपिंग फीस को मंजूरी न देने की शर्त रखी, व्हाइट हाउस बैठक में सख्त रुख

शांति समझौते की कोशिशों के बीच बढ़ा तनाव: ट्रम्प बनाम ईरान

वॉशिंगटन डी.सी. : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ चेतावनी दी है कि यदि ईरान के साथ होने वाले किसी भी अंतिम समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के आवागमन पर शुल्क या माशूल लगाने की अनुमति दी गई, तो वह ऐसे समझौते को मंजूरी नहीं देंगे और उसे रोक देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर किसी भी प्रकार का शुल्क लेना “किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं होगा” और इससे एक ऐसा उदाहरण स्थापित हो सकता है जो अन्य क्षेत्रों में भी समान मांगों को बढ़ावा देगा।

यह बयान उन्होंने नाटो (NATO) के महासचिव मार्क रूटे के साथ व्हाइट हाउस में हुई बातचीत के दौरान दिया। डोनाल्ड ट्रम्प और मार्क रूटे की इस बैठक में उन्होंने दोहराया कि ईरान को इस तरह का कोई शुल्क वसूलने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

वर्तमान स्थिति यह है कि ईरान और अमेरिका के बीच प्रारंभिक सहमति तो बन चुकी है, लेकिन अभी तक कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है और दोनों देशों के बीच वार्ता जारी है। इसी क्रम में स्थायी शांति समझौते की दिशा में आगे बढ़ने के लिए स्विट्ज़रलैंड में भी वार्ता हुई है।

इस बीच दोनों देशों के बीच हुए प्रारंभिक समझौते के तहत एक आभासी माध्यम से एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसमें 60 दिनों के युद्धविराम, कुछ प्रतिबंधों में ढील और क्षेत्रीय तनाव कम करने की रूपरेखा शामिल बताई गई है। इस समझौते में डोनाल्ड ट्रम्प के साथ ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान भी शामिल रहे।

हालांकि वार्ता में अभी भी होर्मुज़ जलडमरूमध्य और लेबनान प्रमुख विवाद के मुद्दे बने हुए हैं। ईरान की संसद के अध्यक्ष महमूद बाघेर गालीबाफ ने स्पष्ट कहा है कि इस जलडमरूमध्य का संचालन ईरान ही करेगा। महमूद बाघेर गालीबाफ के अनुसार इस रणनीतिक मार्ग से होकर जहाजों के आवागमन के दौरान अमेरिका और अन्य देशों के साथ किसी भी गलतफहमी से बचने के लिए व्यवस्था की जाएगी और इसके लिए ‘टेलीफोन हॉटलाइन’ स्थापित करने पर भी सहमति बनी है।

इसी बीच यह भी रिपोर्ट सामने आई है कि ईरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूल सकता है, हालांकि इस पर अंतिम निर्णय स्पष्ट नहीं है। इसके जवाब में अमेरिकी राष्ट्रपति ने दोहराया कि ऐसे किसी भी शुल्क को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा और यदि यह प्रावधान समझौते में शामिल किया गया तो वह उसे स्वीकृति नहीं देंगे।

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