कोलकाता/तरातला : पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के तरातला इलाके में स्थित बेहरा ब्रदर्स के निर्माणाधीन गोदाम ढहने की घटना के बाद अब निर्माण प्रक्रिया और मंजूरी प्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। यह मामला केवल ढहने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब डिजाइन, निगरानी और प्रशासनिक स्वीकृति की पूरी प्रक्रिया जांच के घेरे में आ गई है।
इस पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए भारतीय इंजीनियरिंग विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान, शिवपुर (आईआईईएसटी शिवपुर) के पूर्व रजिस्ट्रार बिमान बंद्योपाध्याय ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद उन्होंने इसे एक गंभीर तकनीकी और प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम बताया। उनके अनुसार यदि डिजाइन और निर्माण सही ढंग से किया गया होता, तो इस तरह का ढांचा इस प्रकार ध्वस्त नहीं होता।
जानकारी के अनुसार लगभग साढ़े चार बीघा भूमि पर स्टील स्ट्रक्चर के ऊपर कंक्रीट का विशाल निर्माण किया जा रहा था, जिसे वेयरहाउस या गोदाम के रूप में विकसित किया जा रहा था। आधुनिक निर्माण में इस तरह के स्टील फ्रेम स्ट्रक्चर का उपयोग आम है, लेकिन इसके डिजाइन और निष्पादन में गंभीर खामियों की आशंका जताई जा रही है।
बिमान बंद्योपाध्याय ने कहा कि जिस तरह से बीम मुड़कर और टूटकर गिरे हैं, वह इस बात का संकेत है कि या तो डिजाइन में गंभीर त्रुटि थी या फिर निर्माण के दौरान निगरानी पूरी तरह से विफल रही। उन्होंने इसे डिजाइन और सुपरविजन दोनों स्तरों पर संभावित लापरवाही बताया।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह की विफलता दो कारणों से हो सकती है—या तो पूरा स्ट्रक्चरल डिजाइन गलत तरीके से तैयार किया गया हो या फिर सही डिजाइन होने के बावजूद साइट पर निर्माण की निगरानी ठीक से नहीं की गई हो। दोनों ही परिस्थितियों में गंभीर चूक की संभावना है।
इसके साथ ही अब निर्माण योजना की मंजूरी प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। यह निर्माण कोलकाता नगर निगम से किस प्रक्रिया के तहत स्वीकृत हुआ, इसकी जांच की मांग उठ रही है। पूर्व रजिस्ट्रार ने संकेत दिया कि बड़े निर्माण प्रोजेक्ट की योजना पहले आर्किटेक्ट और स्ट्रक्चरल इंजीनियर द्वारा तैयार की जाती है और फिर बिल्डिंग प्लान कमेटी के पास जाती है, जहां से अनुमति दी जाती है।
उन्होंने यह भी आशंका जताई कि या तो योजना को पूरी तरह प्रक्रिया के अनुसार मंजूरी नहीं मिली या फिर इसे उच्च स्तर पर प्रभाव के जरिए पास कराया गया। उन्होंने यह भी कहा कि निगरानी में कमी या किसी प्रकार के अनियमित लेन-देन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
इसके अलावा यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि शहरी क्षेत्र में लागू टाउन एंड कंट्री प्लानिंग एक्ट के तहत इस जमीन पर गोदाम या वेयरहाउस निर्माण की अनुमति सही तरीके से ली गई थी या नहीं।
प्राथमिक जानकारी के अनुसार यह जमीन कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट की है, जिसे बेहरा ब्रदर्स नामक कंपनी को लीज पर दिया गया था। इसी जमीन पर यह बड़ा निर्माण कार्य चल रहा था। अब यह भी जांच का विषय बन गया है कि इस परियोजना के लिए सही तरीके से मिट्टी परीक्षण (सॉयल टेस्टिंग) किया गया था या नहीं।
बिमान बंद्योपाध्याय ने इसे एक गंभीर संरचनात्मक विफलता बताते हुए कहा कि यह घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और यह केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि व्यापक स्तर की लापरवाही का परिणाम प्रतीत होती है।