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राजस्थान में सियासी घमासान, डोटासरा ने किरोड़ी लाल मीणा पर लगाए गंभीर आरोप

राजस्थान-हरियाणा जल समझौते और सीमा विवाद पर पारदर्शिता की मांग

जयपुर : राजस्थान में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच कांग्रेस और राज्य सरकार आमने-सामने आ गई हैं। कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने राज्य के मंत्री किरोड़ी लाल मीणा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनसे जुड़े लोगों द्वारा की गई कथित छापेमारी से जुड़ी भ्रष्टाचार की जांच निष्पक्ष रूप से होनी चाहिए।

डोटासरा ने जयपुर में बुधवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में कहा कि यदि मंत्री से जुड़े व्यक्तियों के पास से 2.43 करोड़ रुपये बरामद हुए है, तो यह गंभीर सवाल खड़ा करता है कि क्या यह धन छापेमारी के दौरान वसूला गया या छापेमारी न करने के बदले लिया गया। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की विस्तृत जांच की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि मंत्री स्वयं यह स्वीकार कर चुके हैं कि उन्हें जानकारी देने वाले लोग इसमें शामिल हैं, इसलिए यह उनकी जिम्मेदारी बनती है कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) या विशेष अभियान समूह (एसओजी) जैसी एजेंसियों से निष्पक्ष और समयबद्ध जांच करवाई जाए। डोटासरा के अनुसार यदि कुछ भी छिपाने जैसा नहीं है तो जांच खुलकर और तय समय सीमा में पूरी होनी चाहिए।

इसी मुद्दे पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि इतनी बड़ी बरामदगी के बावजूद केंद्रीय एजेंसियां, जैसे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), अब तक सक्रिय क्यों नहीं हुईं। उन्होंने कहा कि इस देरी से संदेह पैदा होता है और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर हमला बोलते हुए डोटासरा ने कोटा और बीकानेर में प्रसव के दौरान या बाद में महिलाओं की मौतों का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले में गंभीरता नहीं दिखा रही है और अस्पतालों में नकली दवाओं और इंजेक्शनों के उपयोग की शिकायतें सामने आ रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।

उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री के कथित बयान पर भी आपत्ति जताई, जिसमें महिलाओं के प्रसव पीड़ा सहने को लेकर टिप्पणी की गई थी। डोटासरा ने कहा कि सिजेरियन जैसी चिकित्सा प्रक्रियाएं डॉक्टर तय करते हैं, न कि मंत्री। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विरोध के बावजूद प्रभावित परिवारों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है।

डोटासरा ने घोषणा की कि कांग्रेस पार्टी पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी रहेगी और इस मुद्दे पर बड़े आंदोलन की तैयारी की जाएगी। उन्होंने कहा कि वे स्वयं और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली जल्द ही बीकानेर का दौरा करेंगे ताकि जमीनी स्थिति का आकलन किया जा सके।

सीमा क्षेत्रों में धार्मिक संरचनाओं के ध्वस्तीकरण को लेकर भी उन्होंने सरकार पर सवाल उठाए। डोटासरा ने कहा कि बिना उचित सत्यापन के धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है, जो चिंता का विषय है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन सभी कार्रवाई कानून के दायरे में और पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में लोग, चाहे हिंदू हों या मुस्लिम, असंतुष्ट हैं और यदि कोई सुरक्षा योजना बनाई जा रही है तो उसे सर्वदलीय बैठक में साझा किया जाना चाहिए तथा सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए, ताकि किसी तरह का सांप्रदायिक तनाव न पैदा हो।

इसके अलावा, राजस्थान-हरियाणा जल समझौते को लेकर भी डोटासरा ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राजस्थान के हितों की अनदेखी की जा रही है और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में देरी हो रही है। उन्होंने आशंका जताई कि प्रस्तावित पाइपलाइन से हरियाणा पानी का उपयोग कर सकता है, जिससे राजस्थान के हितों को नुकसान होगा।

डोटासरा ने यह भी कहा कि उनके परिवार के सदस्यों को राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) में चयन दिलाने के लिए फर्जी ओबीसी प्रमाणपत्रों के आरोपों पर सरकार को स्वतः संज्ञान लेकर जांच करनी चाहिए। उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस इन सभी मुद्दों को लगातार उठाती रहेगी और सरकार से जवाबदेही की मांग करती रहेगी।

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