भुवनेश्वर : ओडिशा में एक आदिवासी व्यक्ति द्वारा अपनी मृत बहन के बैंक खाते से जमा राशि निकालने के लिए उसका कंकाल बैंक ले जाने की घटना ने पूरे देश का ध्यान खींचा था। अब इस मामले में लगभग दो महीने बाद कार्रवाई करते हुए ओडिशा ग्रामीण बैंक की क्योंझर जिले की मालिपोसी शाखा के प्रबंधक को निलंबित कर दिया गया है। इस संबंध में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को पत्र लिखकर जानकारी दी है।
यह मामला सामने आने के बाद ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने जांच के आदेश दिए थे। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी इस घटना पर उचित कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने 2 मई को इस संबंध में केंद्रीय वित्त मंत्रालय को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया था।
केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने 12 जून को नवीन पटनायक को भेजे गए पत्र में बताया कि संबंधित शाखा प्रबंधक को निलंबित कर दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि वित्त मंत्रालय ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया है और उसी के आधार पर आवश्यक कदम उठाए गए हैं।
इसके साथ ही केंद्र सरकार ने देश के 28 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को निर्देश जारी किए हैं कि वे समाज के वंचित, गरीब और असहाय वर्गों के लोगों के साथ मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करें। जांच के दौरान बैंक की लापरवाही के प्रमाण मिलने के बाद ओडिशा ग्रामीण बैंक को भी निर्देश दिया गया है कि भविष्य में किसी भी व्यक्ति के साथ इस प्रकार का व्यवहार न किया जाए।
दरअसल क्योंझर जिले के दियानाली गांव निवासी आदिवासी युवक जीतू मुंडा अपनी मृत बहन के बैंक खाते से राशि निकालने के लिए कई बार बैंक पहुंचे थे। उनकी बहन का कुछ महीने पहले निधन हो गया था। बहन के खाते में लगभग 19 हजार रुपये जमा थे। बैंक अधिकारियों ने उनसे बहन की मृत्यु का प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा था।
जीतू मुंडा का आरोप था कि ओडिशा ग्रामीण बैंक के कर्मचारियों ने उन्हें बताया कि जब तक उनकी बहन स्वयं बैंक नहीं आएंगी, तब तक खाते में जमा 19,300 रुपये नहीं दिए जा सकते। इसके बाद उन्होंने अपनी बहन की मृत्यु साबित करने के लिए उसका कंकाल बैंक ले जाने का फैसला किया।
बताया जाता है कि भीषण गर्मी के बीच जीतू मुंडा लगभग तीन किलोमीटर पैदल चलकर कब्र से बहन का कंकाल निकालकर बैंक पहुंचे थे। इस घटना की जानकारी सामने आते ही पूरे देश में व्यापक चर्चा शुरू हो गई थी।
हालांकि, जीतू मुंडा द्वारा उत्पीड़न के आरोप लगाए जाने के बाद बैंक प्रशासन ने इन आरोपों से इनकार किया था। बैंक का कहना था कि उन्होंने कभी भी मृत खाताधारक का शव या अवशेष लाने के लिए नहीं कहा था। बैंक के अनुसार उनसे केवल आवश्यक और वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया था।
बैंक की ओर से यह दावा भी किया गया था कि जीतू मुंडा नशे की हालत में इस तरह की हरकत कर बैठे थे। लेकिन बाद में हुई जांच में बैंक की ओर से लापरवाही के प्रमाण मिले, जिसके बाद संबंधित शाखा प्रबंधक के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई।