कोलकाता : तरातला में निर्माणाधीन गोदाम के ढहने से हुए भीषण हादसे के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने बड़े पैमाने पर शहरी निर्माण परियोजनाओं की जांच और अस्थायी रोक का आदेश जारी किया है। हादसे में कई श्रमिकों के दबने और मौत की पुष्टि के बाद प्रशासनिक स्तर पर यह सख्त कदम उठाया गया है।
इस बीच प्राथमिक जांच रिपोर्ट में यह संकेत सामने आए हैं कि तरातला में जिस गोदाम का निर्माण चल रहा था, उसकी योजना में गंभीर त्रुटियां थीं। हादसे के तुरंत बाद सेना, एनडीआरएफ, सिविल डिफेंस, दमकल विभाग, कोलकाता पुलिस और कोलकाता नगर निगम की संयुक्त टीम ने राहत एवं बचाव अभियान चलाया। अब तक 21 लोगों को मलबे से बाहर निकाला जा चुका है, जिनमें 4 लोगों की मौत हो चुकी है।
हादसे के बाद कोलकाता में शहरी विकास और निर्माण गतिविधियों पर व्यापक समीक्षा का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नवान्न में उच्चस्तरीय बैठक के बाद घोषणा की कि कोलकाता नगर निगम क्षेत्र में पूर्व सरकार के दौरान स्वीकृत सभी वाणिज्यिक निर्माण कार्यों को 31 जुलाई तक के लिए रोक दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस अवधि में सभी निर्माण परियोजनाओं का विस्तृत ऑडिट किया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे सभी नियमों के अनुसार संचालित हो रहे हैं या नहीं। इसके लिए एक विशेष प्रतिनिधिमंडल का गठन किया गया है, जिसका नेतृत्व मुख्य सचिव करेंगे।
मुख्यमंत्री के अनुसार, इस जांच में पीडब्ल्यूडी, सिविल डिफेंस, फायर सर्विस, कोलकाता पुलिस और कोलकाता नगर निगम के अधिकारियों की संयुक्त टीम शामिल होगी। यह टीम प्रत्येक निर्माण स्थल का साइट प्लान, बिल्डिंग प्लान और मौके पर निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार करेगी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोलकाता मेट्रो और कोलकाता पोर्ट से लीज पर ली गई भूमि पर हो रहे निर्माण कार्य भी जांच के दायरे में रहेंगे। इसके साथ ही यदि किसी जलाशय या तालाब को भरकर निर्माण किया गया है, तो उसकी भी विशेष जांच की जाएगी।
हालांकि मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जहां अस्पताल, दमकल सेवा और अन्य आपातकालीन सेवाओं से जुड़े निर्माण कार्य चल रहे हैं, वहां निर्माण कार्य पर रोक लागू नहीं होगी।सरकार का यह कदम तरातला हादसे के बाद शहर में निर्माण सुरक्षा और नियामक प्रक्रिया की समीक्षा की दिशा में एक बड़ा निर्णय माना जा रहा है।