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'संविधान हत्या दिवस' पर लोकतंत्र और अधिकारों को लेकर अमित शाह का कांग्रेस पर हमला

आपातकाल 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक लागू रहा।

By शिखा सिंह

Jun 25, 2026 13:18 IST

नई दिल्ली : आपातकाल की घोषणा के 51 साल पूरे होने के मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने 25 जून 1975 को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का काला अध्याय बताते हुए आरोप लगाया कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार और इंदिरा गांधी ने सत्ता के अहंकार और लालच में संविधान की मूल भावना, प्रेस की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति के अधिकार को प्रभावित करने की कोशिश की थी।

अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में इसलिए मनाती है, ताकि आपातकाल के उस दौर को देश की स्मृति में बनाए रखा जा सके।

उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि 25 जून 1975 भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का वह काला दिन था, जब इंदिरा गांधी और कांग्रेस पार्टी के सत्ता के अहंकार और लालच ने संविधान की आत्मा, प्रेस की आजादी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलने का प्रयास किया। अमित शाह ने इस अवसर पर आपातकाल के खिलाफ संघर्ष करने वाले लोकतंत्र सेनानियों को श्रद्धांजलि भी दी।

अमित शाह ने कहा कि ‘संविधान हत्या दिवस’ मनाने का उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को उस दौर की याद दिलाना है, ताकि भविष्य में कांग्रेस जैसी कोई भी राजनीतिक ताकत लोकतंत्र और संविधान पर इस तरह का हमला दोबारा न कर सके।

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने भी आपातकाल को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 25 जून 1975 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने एक परिवार के राजनीतिक हितों को बचाने के लिए पूरे देश में आपातकाल लागू किया था।

जेपी नड्डा ने एक्स पर लिखा कि सत्ता के अहंकार में संविधान की आत्मा को दबाया गया, लोकतंत्र को कैद कर दिया गया, विपक्षी नेताओं को जेलों में डाल दिया गया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगा दी गई। उन्होंने आपातकाल को भारत के लोगों पर किया गया सबसे बड़ा लोकतांत्रिक अत्याचार बताया।

नड्डा ने कहा कि उस दौर की कांग्रेस की सोच ने यह साबित किया कि उनके लिए एक परिवार के हित देश और लोकतंत्र से ऊपर थे। उन्होंने कहा कि आपातकाल ऐसा काला अध्याय है जिसे देश कभी नहीं भूल सकता।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाने का ऐतिहासिक फैसला लिया है, ताकि लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लाखों लोगों के संघर्ष, यातनाओं और बलिदानों को याद किया जा सके। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र पर हमला करने वालों को इतिहास कभी माफ नहीं करता।

जेपी नड्डा ने कहा कि ‘संविधान हत्या दिवस’ के मौके पर वे उन लोकतंत्र सेनानियों, सत्याग्रहियों और देशभक्तों को नमन करते हैं, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद तत्कालीन कांग्रेस सरकार के खिलाफ संघर्ष किया और तानाशाही के सामने झुकने से इनकार किया।

25 जून 1975 को तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत ‘आंतरिक अशांति’ का हवाला देते हुए देश में आपातकाल की घोषणा की थी। यह आपातकाल 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक लागू रहा।

इस अवधि के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार पर मौलिक अधिकारों के निलंबन, विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी और प्रेस पर सेंसरशिप लगाने को लेकर आलोचना हुई थी। कई विपक्षी नेताओं को आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था अधिनियम (मीसा) के तहत गिरफ्तार किया गया था।

आपातकाल के विरोध में जयप्रकाश नारायण ने 1970 के दशक में कांग्रेस सरकार के खिलाफ संपूर्ण क्रांति बिहार आंदोलन का नेतृत्व किया था। शाह आयोग की रिपोर्ट के अनुसार आपातकाल के दौरान बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां, नसबंदी अभियान और प्रेस सेंसरशिप जैसी घटनाएं हुई थीं।

भारतीय जनता पार्टी 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाती है और इस दिन आपातकाल के दौर में लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वालों को याद करती है।

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