🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

NCERT के नए पाठ्यक्रम में 'इमरजेंसी' की एंट्री, छात्रों को पढ़ाया जाएगा लोकतंत्र का कठिन दौर

नई किताब में नागरिक अधिकारों, प्रेस सेंसरशिप और लोकतांत्रिक मूल्यों पर विशेष फोकस।

By श्वेता सिंह

Jun 25, 2026 12:59 IST

नई दिल्लीः राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की नई पुस्तक में पहली बार 1975-77 के 'आपातकाल' को शामिल किया है। ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ नामक इस पुस्तक में 'आपातकाल' को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है।

50 साल बाद पाठ्यक्रम में अहम बदलाव

एनसीईआरटी के अधिकारियों के अनुसार, कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तकों में 'आपातकाल' पर अलग से सामग्री पहली बार जोड़ी गई है। यह बदलाव ऐसे समय में किया गया है, जब हाल ही में देश ने आपातकाल लागू होने के 50 वर्ष पूरे होने को याद किया है।

'आपातकाल' की पृष्ठभूमि को समझाया गया

पुस्तक में बताया गया है कि 1970 के दशक की शुरुआत में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ लोगों में असंतोष बढ़ रहा था। बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और प्रशासनिक कमियों के आरोपों के चलते कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। इसी माहौल में जून 1975 में आंतरिक अशांति का हवाला देकर देश में 'आपातकाल' (इमरजेंसी) लागू किया गया।

मौलिक अधिकारों और प्रेस पर लगी थीं पाबंदियां

किताब में उल्लेख है कि 'आपातकाल' के दौरान अधिकांश मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे। प्रेस पर सेंसरशिप लागू की गई और कई राजनीतिक नेताओं तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। इस दौर में लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ा और नागरिक स्वतंत्रताएं सीमित हो गईं।

जयप्रकाश नारायण के आंदोलन का भी जिक्र

पाठ्यपुस्तक में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की भूमिका को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है। उनके नेतृत्व में चले आंदोलनों ने खासतौर पर बिहार और गुजरात में छात्रों तथा आम नागरिकों को संगठित किया। पुस्तक बताती है कि 1977 में इमरजेंसी समाप्त होने के बाद हुए आम चुनावों में जनता ने मतदान के जरिए लोकतंत्र की ताकत का परिचय दिया।

लोकतंत्र के सामने मौजूद दूसरी चुनौतियां भी शामिल

एनसीईआरटी ने केवल 'आपातकाल' तक चर्चा सीमित नहीं रखी है। पुस्तक में फेक न्यूज, भ्रामक सूचनाएं, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, नियमों का उल्लंघन, गरीबी, क्षेत्रवाद, सामाजिक भेदभाव और लैंगिक असमानता जैसी चुनौतियों को भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है।

‘डेमोक्रेसी एंड यू’ नाम से नया खंड

छात्रों को 'आपातकाल' (इमरजेंसी) से व्यावहारिक रूप से जोड़ने के लिए पुस्तक में ‘डेमोक्रेसी एंड यू’ नामक नया अध्याय जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को यह समझाना है कि एक नागरिक के रूप में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में उनकी क्या भूमिका और जिम्मेदारियां हैं।

नई पुस्तक में भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और संस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। साथ ही लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका को रेखांकित करते हुए उसे ‘लोकतंत्र का चौथा स्तंभ’ बताया गया है। पुस्तक के अनुसार मीडिया जनता की आवाज को सामने लाने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में अहम भूमिका निभाता है।

भारत के लोकतंत्र की व्यापक तस्वीर

पुस्तक में वर्ष 2024 के चुनावी आंकड़ों का भी उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार देश में 96.8 करोड़ से अधिक पंजीकृत मतदाता थे। इसके अलावा विशाल मतदान केंद्र नेटवर्क और राजनीतिक भागीदारी के जरिए भारत के लोकतांत्रिक ढांचे की व्यापकता को समझाने का प्रयास किया गया है।

छात्रों को स्थानीय स्तर पर लोकतंत्र की कार्यप्रणाली समझाने के लिए गुजरात की एक पंचायत और त्रिपुरा की महिला-अनुकूल पंचायत के उदाहरण दिए गए हैं। साथ ही महिलाओं के मतदान अधिकार, राजनीतिक भागीदारी और स्थानीय निकायों में आरक्षण से जुड़े प्रावधानों पर भी विस्तार से चर्चा की गई है।

Articles you may like: