CBSE बोर्ड की 12वीं परीक्षा में शाश्वत बंद्योपाध्या को 96.2 प्रतिशत अंक मिले थे। इससे पहले आईसीएसई बोर्ड की 10वीं परीक्षा में उन्होंने 97.6 प्रतिशत अंक प्राप्त किया था। अब शाश्वत ने एक नया कीर्तिमान हासिल किया है। पश्चिम बंगाल संयुक्त प्रवेश परीक्षा (WBJEE) में शाश्वत ने राज्य भर में पहला स्थान प्राप्त किया है।
शाश्वत की इस शानदार सफलता से परिवार में खुशी और उत्साह का माहौल है। प्राप्त जानकारी के अनुसार शाश्वत राजस्थान के कोटा स्थित अनंतपुर के नालंदा अकादमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल के छात्र है। बचपन से ही गणित के प्रति उसमें विशेष लगाव रहा है। इसी रुचि की वजह से उसने भविष्य में इंजीनियरिंग के क्षेत्र की ओर आगे बढ़ने का फैसला लिया।
भविष्य में शाश्वत देश के किसी प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (CSE) या इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (EE) की पढ़ाई करना चाहता है। शाश्वत के परिवार में भी हमेशा से ही पढ़ाई का माहौल रहा है। उसके पिता शांतनु बंद्योपाध्याय एक ऑर्थोपेडिक सर्जन हैं और मां एमिली बंद्योपाध्याय बाल रोग विशेषज्ञ (पीडियाट्रिशियन) हैं। शाश्वत के दोनों दादा (पिता के पिता और पिता के भाई) भी इंजीनियर थे।
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पढ़ाई के साथ-साथ बचपन से ही शाश्वत की खेल में भी काफी रुचि रही है। उसे शतरंज खेलना बेहद पसंद है। स्पीड चेस के प्रति उसकी रुचि पिछले कुछ समय से लगातार बढ़ती जा रही है। इसके अलावा क्रिकेट, टेनिस, बैडमिंटन और तैराकी में भी उसकी समान रूप से दिलचस्पी रही है।
खाली समय में उसे रहस्य और रोमांच की कहानियां पढ़ना बहुत पसंद है। उसे जासूसी नॉवेल पढ़ना बहुत अच्छा लगता है। उसके पसंदीदा फिक्शन जासूसों में शरलॉक होम्स, फेलुदा और पोयरोट आदि शामिल हैं।
कोलकाता के इस मेधावी छात्र की सफलता पर शिक्षा जगत में गर्व का माहौल है। कठिन परिश्रम और एकाग्रता के मेल से बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। इस बात को शाश्वत बंद्योपाध्याय ने शत-प्रतिशत साबित किया है। हालांकि अपनी इस सफलता से शाश्वत खुद काफी हद तक हैरान है। परीक्षा का रिजल्ट घोषित होने के बाद शाश्वत अपनी इस उपलब्धि से चौंक ही गया था।