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कानपुर की स्टार्टअप तकनीक ने बदली खेती, E-Brushcutter से कम हुआ प्रदूषण

कृषि विज्ञान केंद्रों के जरिए किसानों तक पहुंच रही आधुनिक कृषि तकनीक

By प्रियंका महतो

Jun 18, 2026 19:42 IST

कानपुर : उत्तर प्रदेश के कानपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के सामने लंबे समय से पराली जलाने की समस्या एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। अब इस समस्या के समाधान के लिए एक नई बैटरी चालित मशीन किसानों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है, जो न केवल फसल अवशेषों का बेहतर प्रबंधन कर रही है बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद कर रही है।

पालरा गांव के किसान ननका ने इस तकनीक को अपनाया है और उनके अनुसार इससे खेती की लागत में उल्लेखनीय कमी आई है। उनका कहना है कि यह बैटरी से चलने वाला ब्रश कटर लगभग दस मजदूरों के बराबर काम कर सकता है। इसके माध्यम से फसल अवशेषों को अलग किया जा सकता है, जिसे अब पशुओं के चारे के रूप में उपयोग किया जा रहा है।

किसान ननका ने बताया कि इस तकनीक से खेत में पराली जलाने की आवश्यकता समाप्त हो गई है और फसल के दाने तथा भूसे को अलग करना भी आसान हो गया है, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है।

इस मशीन को कानपुर स्थित स्टार्टअप अल्टरनेटिव फार्मटेक प्राइवेट लिमिटेड ने अपने ब्रांड विकल्प के तहत विकसित किया है। कंपनी का उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों के लिए सस्ती और व्यावहारिक कृषि तकनीक उपलब्ध कराना है।

कंपनी के सह-संस्थापक पुनीत गोयल ने बताया कि यह मशीन पराली जलाने की जड़ समस्या को खत्म करने में सक्षम है। उनके अनुसार पहले कम श्रम उपलब्धता के कारण किसान हार्वेस्टर का उपयोग करने को मजबूर होते थे, जिससे खेत में फसल अवशेष रह जाते थे और पराली जलाने की समस्या बढ़ती थी।

उन्होंने बताया कि यह मशीन फसल को जड़ों के पास से काटती है, जिससे खेत में लगभग कोई अवशेष नहीं बचता और एक व्यक्ति एक दिन में करीब एक एकड़ तक काम कर सकता है।

इस मशीन की कीमत लगभग ₹65,000 है और इसे संबंधित सरकारी अनुमोदन भी प्राप्त है। इसे कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किसानों तक पहुंचाया जा रहा है, जहां सब्सिडी और सहायता कार्यक्रमों के तहत इसे उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही किसानों को इसके उपयोग के लिए प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

किसान पिंकी ने कहा कि यह तकनीक पर्यावरण के लिए भी लाभदायक है और अन्य किसानों को भी इसे अपनाना चाहिए। उनके अनुसार पराली जलाने से प्रदूषण बढ़ता है और यह मशीन इस समस्या का प्रभावी समाधान प्रदान करती है।

एक अन्य किसान रामप्रकाश ने बताया कि यह मशीन कम समय में अधिक काम करती है और फसल अवशेषों को पशु चारे के रूप में उपयोग किया जा सकता है, जिससे किसी प्रकार की बर्बादी नहीं होती।

इस नवाचार के पीछे किसान और उद्यमी विवेक चतुर्वेदी ने बताया कि यह देश की पहली बैटरी चालित ब्रश कटर मशीन है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल से चलने वाली मशीनों की तुलना में इसकी परिचालन लागत बहुत कम है और यह प्रदूषण भी नहीं फैलाती।

उन्होंने बताया कि पेट्रोल आधारित मशीनों में प्रति घंटे लगभग ₹100 की लागत आती है, जबकि इस बैटरी चालित मशीन को पूरे दिन चलाने में लगभग ₹5 का खर्च आता है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक कृषि क्षेत्र में स्वच्छ और टिकाऊ खेती की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पराली जलाने की समस्या को कम करने के साथ-साथ यह किसानों की आय और उत्पादकता दोनों में सुधार कर रही है।

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