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खेल मंत्री इंद्रनील खां से मिले सौरव गांगुली, अभिषेक डालमिया के आरोपों पर सीएबी का पलटवार

सोशल मीडिया पर पत्र सार्वजनिक करने से लेकर प्रशासनिक कार्यशैली तक, सीएबी ने अभिषेक डालमिया पर साधा निशाना।

कोलकाता : क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (सीएबी) में उठे विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। पूर्व अध्यक्ष अभिषेक डालमिया द्वारा राज्य के खेल मंत्री इंद्रनील खां को लिखे खुले पत्र के बाद सीएबी की ओर से भी आधिकारिक जवाब भेजा गया है। बुधवार को सीएबी अध्यक्ष सौरव गांगुली ने खेल मंत्री से मुलाकात कर संस्था की ओर से अपना पक्ष रखा। इसके बाद कोलकाता के क्रिकेट और खेल जगत में इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

पिछले सप्ताह अभिषेक डालमिया ने खेल मंत्री इंद्रनील खां को एक खुला पत्र लिखा था। उस पत्र में उन्होंने किसी व्यक्ति या पदाधिकारी का नाम लिए बिना सीएबी में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को लेकर सवाल उठाए थे। उनका आरोप था कि प्रतिभा के बजाय पैसे के प्रभाव से कुछ खिलाड़ियों को अवसर दिए गए हैं।

इन आरोपों के जवाब में सीएबी प्रबंधन समिति की ओर से खेल मंत्री को एक विस्तृत पत्र सौंपा गया। हालांकि अभिषेक डालमिया ने अपने पत्र में न तो सीएबी का नाम सीधे तौर पर लिया था और न ही सौरव गांगुली का, लेकिन सीएबी की ओर से भेजे गए जवाबी पत्र में अभिषेक डालमिया का नाम स्पष्ट रूप से उल्लेखित किया गया है।

सीएबी की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि संस्था क्रिकेट संचालन में किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार को बढ़ावा नहीं देती। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि संगठन में एक एथिक्स ऑफिसर नियुक्त हैं, जो सभी नैतिक और प्रशासनिक मामलों पर निगरानी रखते हैं।

सीएबी ने अपने पत्र में कहा, "सीएबी में एक एथिक्स ऑफिसर मौजूद हैं। कोलकाता उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश ज्योतिर्मय भट्टाचार्य लंबे समय से इस जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं। वह इन सभी मामलों पर नजर रखते हैं और पूरी सतर्कता के साथ काम करते हैं। इसलिए अभिषेक डालमिया द्वारा लगाए गए आरोप सही नहीं हैं।"

हालांकि सीएबी के भीतर ही कुछ लोगों का मानना है कि फर्जी आधार कार्ड के जरिए किसी दूसरे राज्य के खिलाड़ी के खेलने या धन के बदले खिलाड़ियों को अवसर दिए जाने जैसे मामलों की जांच करना एथिक्स ऑफिसर की जिम्मेदारी के दायरे में नहीं आता। इस वजह से विवाद और बहस का दायरा बढ़ता दिखाई दे रहा है।

सीएबी के पत्र में अभिषेक डालमिया के रुख पर भी सवाल उठाए गए हैं। संस्था ने याद दिलाया कि इससे पहले विश्वनाथ दत्ता, जगमोहन डालमिया, सौरव गांगुली और स्नेहाशीष गांगुली जैसे कई लोग सीएबी अध्यक्ष पद संभाल चुके हैं। पत्र में कहा गया कि अभिषेक डालमिया स्वयं भी सीएबी के अध्यक्ष रह चुके हैं, लेकिन उनके पत्र की भाषा से ऐसा प्रतीत होता है मानो उनके कार्यकाल को छोड़कर बाकी सभी अवधियों में सीएबी का संचालन सही तरीके से नहीं हुआ।

जवाबी पत्र में यह प्रश्न भी उठाया गया कि अभिषेक डालमिया ने अपने पत्र को सार्वजनिक रूप से सोशल मीडिया पर क्यों साझा किया। सीएबी का मानना है कि इस प्रकार के मुद्दों को सार्वजनिक मंच पर लाने के बजाय उचित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत उठाया जाना चाहिए था।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच मंगलवार को कोलकाता स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट क्लब में आयोजित 'मीट द प्रेस' कार्यक्रम में राज्य के नए खेल मंत्री इंद्रनील खां ने कहा था कि वह जल्द ही अभिषेक डालमिया से मुलाकात कर इस विषय पर चर्चा करेंगे। खेल जगत से जुड़े कई लोगों का मानना है कि इसके तुरंत बाद सौरव गांगुली का खेल मंत्री से मिलना इस विवाद की बढ़ती गंभीरता को दर्शाता है।

हालांकि सौरव गांगुली ने इस मुलाकात को लेकर अलग वजह बताई। उनका कहना था कि वह बंगाल प्रो टी-20 लीग के फाइनल के लिए खेल मंत्री को आमंत्रित करने पहुंचे थे और इसी दौरान कुछ अन्य विषयों पर भी चर्चा हुई।

मुलाकात का वास्तविक उद्देश्य चाहे जो भी रहा हो, लेकिन मौजूदा समय में सौरव गांगुली और अभिषेक डालमिया के बीच बढ़ता विवाद कोलकाता के खेल जगत का सबसे चर्चित विषय बन गया है। दोनों पक्षों के पत्रों ने इस बहस को और तेज कर दिया है और अब सभी की नजर खेल मंत्री की आगामी बैठकों और संभावित कदमों पर टिकी हुई है।

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