🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

भारत की नागरिकता का प्रमाण अगर पासपोर्ट नहीं तो कौन सा दस्तावेज साबित करेगी नागरिकता?

पासपोर्ट की तुलना उन दस्तावेजों से बिल्कुल नहीं करनी चाहिए जो भारत की नागरिकता को साबित करता है।

By Moumita Bhattacharya

Jun 25, 2026 14:09 IST

भारत का पासपोर्ट इस देश की नागरिकता का प्रमाण नहीं है। बुधवार (24 जून) की शाम से इस खबर के सामने आने के बाद से ही हलचल मच गई है। विदेश मंत्रालय (MEA) के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि पासपोर्ट सिर्फ विदेश यात्रा की आवाजाही को सुगम बनाने का एक दस्तावेज है। यह नागरिकता का प्रमाण नहीं है।

साथ ही कहा है कि इसकी तुलना उन दस्तावेजों से बिल्कुल नहीं करनी चाहिए जो भारत की नागरिकता को साबित करता है।

मीडिया रिपोर्ट में उक्त अधिकारी के हवाले से बताया गया कि विदेश यात्रा के दौरान पासपोर्ट यात्री की राष्ट्रीयता को साबित करता है लेकिन यह देश की नागरिकता को साबित करने वाला दस्तावेज नहीं है। विदेश मंत्रालय के हालिया बयानों ने सबको चौंका दिया है। साथ ही यह भी सवाल उठ रहा है कि भारत की नागरिकता को साबित करने के लिए कौन सा दस्तावेज पक्का सबूत माना जाएगा?

Read Also | अमृतसर एयर ट्रैफिक दबाव के बीच पाकिस्तान की सीमा में पहुंची एयर इंडिया की फ्लाइट

क्यों हैरान कर रहा है यह तर्क?

विदेश मंत्रालय का यह तर्क बेहद हैरान करने वाला माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि पासपोर्ट अधिनियम 1967 इसी आधार पर काम ही करता है कि पासपोर्ट धारक एक भारतीय नागरिक है।

इस कानून की धारा 5 के बाद पासपोर्ट अथॉरिटी अच्छी तरह से यह जांच-परख के बाद ही पासपोर्ट जारी करती है कि धारक भारतीय है। इसी कानून की धारा 6(2)(A) में कहा गया है कि अगर आवेदक भारतीय नहीं है, तो पासपोर्ट जारी नहीं की जा सकती है।

किसी भी भारतीय नागरिक को पुलिस वेरिफिकेशन, सरकारी रिकॉर्ड्स की अच्छी तरह से जांच के बाद ही पासपोर्ट जारी किया जाता है। हालांकि अगर सरकार को पता चलता है कि धारक ने धोखे से या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट हासिल किया है, तो वह उसे रद्द या जब्त कर सकती है। यह अधिकार सरकार के पास होता है।

विदेश मंत्रालय का कहना है कि अब 'नागरिकता का सबूत' और 'राष्ट्रीयता के साक्ष्य' में अंतर है।

Read Also | रेलवे की बड़ी योजना: वंदे भारत और राजधानी में मिलेगा झालमुड़ी स्नैक

क्या वोटर आईडी और आधार है नागरिकता का सबूत?

हिंदुस्तान की मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि वोटर आईडी सिर्फ इस बात को साबित करता है कि धारक का नाम मतदाता सूची में जारी है। यह धारक की नागरिकता का सबूत नहीं है। उसी प्रकार आधार कार्ड को भी कानूनी तौर पर नागरिकता का सबूत नहीं माना जाता है। यह भारत के निवासियों का एनरोलमेंट करता है लेकिन यह आवश्यक नहीं कि भारत का निवासी भारत का नागरिक भी हो। पैन कार्ड मुख्य रूप से करदाताओं की पहचान करता है। राशन कार्ड एक सरकारी हितकारी योजना मात्र बतायी जाती है।

नागरिकता प्रमाणपत्र?

जी नहीं। जन्म से भारत का नागरिक रहे किसी भी व्यक्ति के लिए इसे नागरिकता का पक्का सबूत नहीं माना जाता है। यह प्रमाणपत्र मुख्य रूप से उन लोगों के पास होता है जिन्होंने बाद में रजिस्ट्रेशन अथवा किसी कारण या प्रकार से नागरिकता हासिल की है। बताया जाता है कि जन्म से भारत का नागरिक रहे बहुसंख्यक व्यक्तियों के पास यह प्रमाणपत्र नहीं होता है।

क्या है भारत की नागरिकता का सबूत?

अगर किसी व्यक्ति का जन्म 26 जनवरी 1950 से 1 जुलाई 1987 के बीच भारत के किसी भी प्रांत या शहर में हुआ है तो उसे स्वतः भारत की नागरिकता मिल जाएगी।

जिन व्यक्तियों का जन्म 1987 से 2003 के बीच हुआ है, अगर उनके माता-पिता दोनों अथवा दोनों में से कोई एक व्यक्ति भारत का नागरिक हो और दूसरा अवैध प्रवासी न हो तो उसे भारत की नागरिकता मिल जाएगी।

2003 के बाद जन्मे लोगों को भारत की नागरिकता देने के मामले में भी मुख्य रूप से यहीं नियम लागू है।

जिन बच्चों का जन्म विदेश में हुआ है, उन्हें माता-पिता के आधार पर वंश परंपरा के तहत नागरिकता मिल जाएगी। यहां शर्त यह है कि जन्म के एक साल के अंदर भारतीय दूतावास में उनका पंजीकरण करवा लिया गया हो।

FAQs :

क्या भारत का पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाणपत्र है?

विदेश मंत्रालय की ओर से हाल ही में जारी बयान के मुताबिक भारत का पासपोर्ट नागरिकता को साबित करने का पक्का सबूत नहीं है।

पासपोर्ट का क्या है औचित्य?

भारत का पासपोर्ट विदेश यात्रा को सुगम बनाने के लिए एक आवश्यक दस्तावेज है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक यह नागरिकता को नहीं बल्कि भारत की राष्ट्रीयता को साबित करता है।

Articles you may like: