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होरमुज में जहाजों की आवाजाही पर ईरान सख्त, केवल अधिकृत मार्गों के इस्तेमाल की चेतावनी

होरमुज जलडमरूमध्य पर बढ़ी कूटनीतिक सक्रियता, ईरान-ओमान ने 60 दिन की योजना पर किया मंथन

By रजनीश प्रसाद

Jun 26, 2026 12:23 IST

तेहरान (ईरान) : पश्चिम एशिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग होरमुज जलडमरूमध्य को लेकर कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। ईरान और ओमान ने इस रणनीतिक जलमार्ग में समुद्री यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए प्रस्तावित 60 दिन की योजना पर चर्चा की है। दूसरी ओर अमेरिका और खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) ने इस जलमार्ग में बिना किसी शुल्क और प्रतिबंध के नौवहन की आवश्यकता दोहराई है। इस बीच, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) नौसेना ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल ईरान द्वारा स्वीकृत समुद्री मार्गों का ही उपयोग किया जा सकता है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और ओमान के विदेश मंत्री सैय्यद बद्र अलबुसैदी के बीच हुई बातचीत में होरमुज जलडमरूमध्य के भविष्य के प्रशासन और समुद्री सेवाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। ईरानी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार दोनों नेताओं ने 60 दिन की समुद्री यातायात योजना पर विचार-विमर्श किया। इसके बाद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बताया कि दोनों देशों ने इस रणनीतिक जलमार्ग के भविष्य के संचालन और समुद्री सेवाओं को लेकर पड़ोसी देशों के साथ मिलकर संवाद जारी रखने पर सहमति जताई है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब बहरीन की राजधानी मनामा में अमेरिका और जीसीसी देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में होरमुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत निर्बाध नौवहन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। बैठक की सह-अध्यक्षता अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल्लतीफ बिन राशिद अल ज़यानी ने की। संयुक्त बयान में कहा गया कि इस समुद्री मार्ग पर किसी प्रकार का शुल्क, कर या नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास स्वीकार्य नहीं होगा।

ओमान ने भी अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के समन्वय से जहाजों के लिए एक समुद्री ट्रांजिट कॉरिडोर उपलब्ध कराने की घोषणा की। ओमान का कहना है कि इसका उद्देश्य बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना है। साथ ही यह पहल अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया प्रयासों के अनुरूप है।

हालांकि ईरान की आईआरजीसी नौसेना ने इस प्रस्ताव पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उसने कहा कि कुछ पक्षों ने तेहरान से परामर्श किए बिना नया समुद्री मार्ग घोषित कर दिया जो स्वीकार्य नहीं है। आईआरजीसी ने चेतावनी दी कि केवल ईरान द्वारा निर्धारित मार्गों से ही जहाजों को गुजरने की अनुमति होगी। इसके अलावा सभी जहाजों के लिए आईआरजीसी नौसेना के साथ चैनल-16 पर संपर्क बनाए रखना अनिवार्य बताया गया है। नियमों का उल्लंघन करने वाले जहाजों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।

इस पूरे घटनाक्रम पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि ईरान के साथ होने वाले किसी समझौते में होरमुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर किसी प्रकार का शुल्क लगाने का प्रावधान शामिल होता है तो यह उनके लिए पूरी तरह अस्वीकार्य होगा। नाटो के महासचिव मार्क रुटे के साथ बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि यदि एक जलडमरूमध्य पर ऐसा किया गया तो दुनिया के अन्य महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर भी इसी तरह की मांग उठ सकती है जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने इसे वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए बड़ा बदलाव बताया।

होरमुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा और व्यापारिक समुद्री मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव न केवल पश्चिम एशिया बल्कि पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।

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