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शहज़ाद भट्टी का भर्ती नेटवर्क अब भी सक्रिय, पश्चिमी यूपी पर एजेंसियों की कड़ी नजर

सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को फंसा रहा आतंकी मॉड्यूल, एजेंसियों का बड़ा खुलासा। डिजिटल फुट सोल्जर्स तैयार कर रहे विदेशी हैंडलर।

By डॉ. अभिज्ञात

Jun 27, 2026 14:35 IST

नई दिल्ली: पाकिस्तान में बैठे गैंगस्टर से आतंकी बने शहज़ाद भट्टी के नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई के बावजूद उसकी भर्ती की गतिविधियां पूरी तरह थमी नहीं हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिले नए युवाओं की भर्ती के लिए प्रमुख केंद्र बनते जा रहे हैं। जांच एजेंसियां अब केवल आतंकियों की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि पूरे भर्ती तंत्र को खत्म करने की रणनीति पर काम कर रही हैं।

लगातार गिरफ्तारी के बाद भी जारी है भर्ती अभियान

जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक पिछले कुछ महीनों में कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने इस नेटवर्क से जुड़े कई ऑपरेटिवों को गिरफ्तार किया है। कई अन्य लोगों की पहचान कर उनसे पूछताछ की गई है और उन्हें निगरानी में रखा गया है। पुलिस ने संवेदनशील युवाओं के परिवारों से भी संपर्क कर उन्हें ऑनलाइन कट्टरपंथ और भर्ती के प्रयासों के प्रति जागरूक किया है। इसके बावजूद जांचकर्ताओं का कहना है कि चुनौती अब केवल अलग-अलग मॉड्यूल को ध्वस्त करने तक सीमित नहीं रह गई है।

'फुट सोल्जर्स' तैयार करने पर नेटवर्क का फोकस

अधिकारियों के अनुसार नेटवर्क अब ऐसे युवाओं को तैयार कर रहा है जिन्हें 'फुट सोल्जर्स' कहा जा रहा है। शुरुआती दौर में इन युवाओं को हथियार उठाने या किसी हिंसक गतिविधि में शामिल होने के लिए नहीं कहा जाता, बल्कि कम जोखिम वाले लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कार्य सौंपे जाते हैं। इनसे संवेदनशील स्थानों की तस्वीरें और वीडियो जुटाने, सिम कार्ड उपलब्ध कराने, डिजिटल संचार को आसान बनाने तथा विदेश में बैठे हैंडलरों तक लॉजिस्टिक जानकारी पहुंचाने जैसे काम कराए जाते हैं।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के युवाओं को बनाया जा रहा निशाना

सूत्रों के अनुसार हालिया जांच में जिन लोगों की पहचान हुई है, उनमें बड़ी संख्या गाज़ियाबाद, मेरठ, सहारनपुर और मथुरा जिलों से जुड़ी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क तकनीकी जानकारी रखने वाले युवाओं, मोबाइल रिपेयर तकनीशियनों, सीसीटीवी ऑपरेटरों और आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे लोगों को विशेष रूप से निशाना बना रहा है।

सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड ऐप्स से हो रही भर्ती

अधिकारियों का कहना है कि भर्ती का पूरा मॉडल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप्लिकेशन पर आधारित है। युवाओं को आसान पैसे का लालच देकर संपर्क किया जाता है और धीरे-धीरे उन्हें अधिक संवेदनशील जिम्मेदारियां दी जाती हैं। कई बार उन्हें यह भी पता नहीं होता कि वे किस बड़े नेटवर्क का हिस्सा बन चुके हैं।

हर गिरफ्तारी के बाद शुरू हो जाती है नई भर्ती

सुरक्षा एजेंसियों की चिंता इस बात को लेकर भी है कि हर गिरफ्तारी के बाद नए लोगों की भर्ती की कोशिशें शुरू हो जाती हैं। इससे संकेत मिलता है कि यह नेटवर्क विकेंद्रीकृत तरीके से संचालित हो रहा है और भारत के बाहर बैठे हैंडलर लगातार नए संपर्क तैयार करने में सक्षम हैं।

परिवारों और समाज की भूमिका को माना जा रहा अहम

इस चुनौती से निपटने के लिए पुलिस ने स्थानीय समुदायों और परिवारों की भागीदारी वाले जागरूकता अभियान तेज कर दिए हैं। जांचकर्ताओं का मानना है कि अभिभावकों की सतर्कता और समाज का सहयोग युवाओं को इस तरह के नेटवर्क का हिस्सा बनने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

भर्ती की पूरी कड़ी तोड़ने पर एजेंसियों का जोर

अधिकारियों का कहना है कि यह लड़ाई केवल गिरफ्तारी और बरामदगी तक सीमित नहीं है। अब सुरक्षा एजेंसियों का मुख्य उद्देश्य भर्ती की पूरी श्रृंखला को तोड़ना है, ताकि विदेश में बैठे हैंडलर भारतीय युवाओं का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए न कर सकें।


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