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पासपोर्ट और आधार को नागरिकता का प्रमाण बनाने की वकालत, शशि थरूर ने सुझाए कानूनी सुधार

पासपोर्ट पर केंद्र के स्पष्टीकरण के बाद शशि थरूर ने उठाए सवाल, कानून में व्यापक संशोधन की वकालत।

By रजनीश प्रसाद

Jun 26, 2026 14:53 IST

नई दिल्ली : पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं मानने संबंधी केंद्र सरकार के स्पष्टीकरण के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से कई सवाल पूछते हुए मौजूदा व्यवस्था को "बेतुका कानूनी विरोधाभास" करार दिया है। उन्होंने कहा कि इस भ्रम को समाप्त करने के लिए सामान्य समझ पर आधारित व्यापक कानूनी संशोधन किए जाने चाहिए ताकि नागरिकों को अपनी पहचान और नागरिकता को लेकर किसी तरह की असमंजस की स्थिति का सामना न करना पड़े।

शशि थरूर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर विस्तृत टिप्पणी करते हुए विदेश मंत्रालय द्वारा पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर जारी स्पष्टीकरण का उल्लेख किया। मंत्रालय ने कहा था कि भारतीय पासपोर्ट मुख्य रूप से यात्रा दस्तावेज है और इसे नागरिकता का अंतिम एवं निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता। थरूर ने स्वीकार किया कि सरकार का यह पक्ष पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 20 पर आधारित है लेकिन आम नागरिकों के लिए इसका व्यावहारिक अर्थ समझना कठिन है।

उन्होंने कहा कि दशकों से भारतीय पासपोर्ट को सबसे विश्वसनीय सरकारी पहचान दस्तावेज माना जाता रहा है। पासपोर्ट जारी करने से पहले पुलिस सत्यापन और दस्तावेजों की विस्तृत जांच की जाती है। ऐसे में यदि उसी दस्तावेज को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाए तो यह एक विरोधाभासी स्थिति पैदा करता है। उन्होंने सवाल किया कि यदि पासपोर्ट भी नागरिकता साबित नहीं करता तो आखिर कौन-सा दस्तावेज नागरिकता का अंतिम प्रमाण माना जाएगा।

थरूर ने इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का भी उल्लेख किया जिसमें आधार कार्ड को केवल पहचान और निवास का प्रमाण माना गया है नागरिकता का नहीं। उन्होंने कहा कि मौजूदा कानूनी व्यवस्था के कारण लाखों भारतीय ऐसी स्थिति में हैं, जहां उनके पास सरकार द्वारा जारी अत्याधुनिक पहचान दस्तावेज तो हैं, लेकिन उनमें से कोई भी कानूनी रूप से नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता।

इस विवाद को समाप्त करने के लिए थरूर ने कानूनी ढांचे में संशोधन का सुझाव दिया। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि वैध भारतीय पासपोर्ट और सामान्य आधार कार्ड को तब तक भारतीय नागरिकता का पर्याप्त और अंतिम प्रमाण माना जाए, जब तक सरकार उन्हें रद्द या निरस्त न कर दे। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) गैर-भारतीय निवासियों के लिए अलग रंग या अलग स्वरूप वाला आधार कार्ड जारी करे। इससे भारतीय नागरिकों और गैर-नागरिक निवासियों के बीच स्पष्ट अंतर किया जा सकेगा।

गौरतलब है कि विदेश मंत्रालय ने बुधवार को स्पष्ट किया था कि भारतीय पासपोर्ट मुख्य रूप से यात्रा दस्तावेज है, न कि नागरिकता का अंतिम प्रमाण। इसके बाद गुरुवार को सरकार ने दोबारा कहा कि न तो हाल में और न ही पिछले 12 वर्षों में पासपोर्ट को नागरिकता का प्रमाण मानने का कोई निर्णय लिया गया है। सरकार ने पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 20 और बॉम्बे उच्च न्यायालय के वर्ष 2013 के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि कुछ परिस्थितियों में गैर-नागरिकों को भी सार्वजनिक हित में पासपोर्ट जारी किया जा सकता है, इसलिए केवल पासपोर्ट का होना भारतीय नागरिकता सिद्ध नहीं करता।

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