नई दिल्ली : अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) की नई ओलंपियन ग्रांट योजना को भारत के सबसे सफल शीतकालीन ओलंपियन शिव केशवन ने खिलाड़ियों के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। उनका कहना है कि यह आर्थिक सहायता खिलाड़ियों को केवल वित्तीय सुरक्षा ही नहीं देगी, बल्कि उन्हें खेल के साथ-साथ स्थायी करियर बनाने में भी मदद करेगी। केशवन के अनुसार, इस योजना को पुरस्कार नहीं बल्कि खिलाड़ियों के वर्षों के संघर्ष और समर्पण की पहचान के रूप में देखा जाना चाहिए।
आईओसी ने अपनी 'फिट फॉर द फ्यूचर' रणनीति के तहत इस योजना की शुरुआत की है। इसके तहत मिलानो-कोर्तीना शीतकालीन ओलंपिक 2026 से भाग लेने वाले प्रत्येक ओलंपियन को हर ओलंपिक संस्करण के लिए 10 हजार अमेरिकी डॉलर के अनुदान के लिए आवेदन करने का अवसर मिलेगा। इस कार्यक्रम के लिए प्रत्येक ओलंपिक चक्र में 14 करोड़ अमेरिकी डॉलर का कोष निर्धारित किया गया है, जिससे लगभग 14 हजार खिलाड़ियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। आवेदन प्रक्रिया इस वर्ष शुरू होगी, जबकि पहली किस्त 2027 में जारी की जाएगी।
छह बार शीतकालीन ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके और ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया एथलीट्स आयोग के उपाध्यक्ष शिव केशवन ने कहा कि ओलंपिक स्तर तक पहुंचने के लिए खिलाड़ी वर्षों तक कठिन परिश्रम और त्याग करते हैं। ऐसे में यह अनुदान उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगा और भविष्य की बेहतर योजना बनाने में सहायक होगा। उन्होंने राष्ट्रीय ओलंपिक समितियों और सरकारों से भी खिलाड़ियों के लिए ऐसी पहल को आगे बढ़ाने की अपील की।
भारत के आरिफ मोहम्मद खान और स्टैंजिन लुंडुप इस योजना के पहले भारतीय लाभार्थियों में शामिल होंगे। शीतकालीन खिलाड़ी स्टैंजिन लुंडुप का मानना है कि यह पहल देश में अधिक युवाओं को शीतकालीन खेलों की ओर आकर्षित करेगी। उन्होंने कहा कि भारत के पास विश्वस्तरीय पर्वत और प्राकृतिक स्कीइंग ढलान हैं, लेकिन बेहतर बुनियादी ढांचे और प्रशिक्षण सुविधाओं की अभी भी जरूरत है।
लुंडुप ने बताया कि भारतीय शीतकालीन खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के लिए लंबे समय तक विदेशों में रहना पड़ता है, जिससे यात्रा, आवास, कोचिंग और उपकरणों पर भारी खर्च आता है। यह अनुदान उस आर्थिक दबाव को कम करेगा और खिलाड़ियों को प्रशिक्षण पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का अवसर देगा।
शिव केशवन ने इस बात पर भी जोर दिया कि शीतकालीन खेलों के खिलाड़ियों को भी ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खिलाड़ियों के समान सहयोग मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में ग्रीष्मकालीन खेल लोकप्रिय इसलिए बने क्योंकि वहां स्टार खिलाड़ी उभरे। यदि शीतकालीन खिलाड़ियों को भी समान अवसर और संसाधन मिलें, तो वे भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन सकते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में आईओसी खिलाड़ियों के हित में और भी ऐसी योजनाएं लेकर आएगा।