आपने अक्सर सुना होगा कि किसी राज्य अथवा प्रांत की किसी वस्तु को केंद्र सरकार ने GI Tag (Geographical Indication Tag) यानी भौगोलिक संकेत टैग प्रदान किया है। ये ऐसी चीजें होती हैं जो खास तौर पर उस राज्य में ही उत्पादित होती हैं, जो उस राज्य की पहचान का एक अभिन्न हिस्सा बन चुकी होती है।
केरल का कॉटन हो या मैंगलुरु का सिल्क। क्या आप जानते हैं पिछले कई सालों में पश्चिम बंगाल से कौन-कौन सी वस्तुओं को GI टैग प्रदान करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास भेजा गया है? क्या आप जानते अब तक पश्चिम बंगाल की कौन-कौन सी वस्तुओं को GI टैग मिल चुका है?
आइए इस दिलचस्प जानकारी पर एक नजर डाल लेते हैं :-
46 वस्तुओं के GI Tag का दिया गया प्रस्ताव
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce & Industry) के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (Department For Promotion of Industry and Internal Trade) से प्राप्त जानकारी के मुताबिक पिछले 5 सालों के दौरान पश्चिम बंगाल से 46 वस्तुओं को GI टैग प्रदान करने का प्रस्ताव दिया गया है।
इनमें से अधिकांश वस्तुएं हस्तशिल्प, कपड़ा उद्योग के साथ-साथ प्राकृतिक वस्तुएं, मिठाईयां-खाद्य सामग्री और कृषि के क्षेत्र में प्रस्तावित हैं। कई वस्तुओं को तो GI टैग प्रदान भी किया जा चुका है, वहीं कुछ वस्तुओं के लिए भेजा गया प्रस्ताव अभी भी लंबित है।
साल 2014 के बाद प्रस्तावित 2 वस्तुओं को GI टैग प्रदान नहीं करने का फैसला लिया गया है। ये दोनों वस्तुएं ही खाद्य सामग्री श्रेणी में आती हैं।
कौन सी 46 वस्तुओं को GI टैग के लिए किया गया प्रस्तावित?
- कृष्णनगर की मिट्टी की गुड़िया (हस्तकला)
- नतुनग्राम की लकड़ी की गुड़िया (हस्तकला)
- शांतिनिकेतन बाटिक (कपड़ा उद्योग)
- कोलकत्ती गहने (हस्तकला)
- पुरुलिया का लाख (प्राकृतिक सामग्री)
- बेगमपुर की सूति हैंडलुम साड़ी (कपड़ा उद्योग)
- फुलिया जामदानी साड़ी (कपड़ा उद्योग)
- कूचबिहार शीतलपाटी (हस्तकला)
- शांतिनिकेतन इकतारा (हस्तकला)
- बंगाल सबाई (हस्तकला)
- चंदननगर जलभरा संदेश (खाद्य सामग्री)
- जनाई मनोहरा (खाद्य सामग्री)
- बंगाल का सिंगिंग बोल (हस्तकला)
- आशापुर का बैगन (कृषि)
- बांकुड़ा की शंख कला (हस्तकला)
- बेलियातोड़ मेचा संदेश (खाद्य सामग्री)
- विष्णुपुर दशावतार ताश (हस्तकला)
- कनकचुड़ चावल (कृषि)
- शोलापीठ कला (हस्तकला)
- खागड़ा का कांसे से बने बर्तन (हस्तकला)
- बांकुड़ा के कांसे से बने बर्तन (हस्तकला)
- नोलेन गुड़ यानी खजूर का गुड़ (कृषि)
- मुर्शिदाबाद सिल्क (कपड़ा उद्योग)
- बालागढ़ की नाव (हस्तकला)
- काखरा और गरगरे पीठा (खाद्य सामग्री)
- शांतिनिकेतन अल्पना (हस्तकला)
- नवाबगंज के बैगन (कृषि)
- खीरपाई का बाबरशाह (खाद्य सामग्री)
- हुगली की रबड़ी (खाद्य सामग्री)
- जामदानी साड़ी (कपड़ा उद्योग)
- बांग्ला पान (कृषि)
- बाबनान चिकन कढ़ाई (कपड़ा उद्योग)
- गुपो संदेश (खाद्य सामग्री)
- थंका पेंटिंग (हस्तकला)
- कालिम्पोंग की चांदी की सामग्री (हस्तकला)
- बेलपहाड़ी के पत्थर से बने सामान (हस्तकला)
- दक्षिणपूर्व पश्चिम बंगाल का ब्राह्मी (कृषि)
- बंडेल का चीज (खाद्य सामग्री)
- महुआ (उत्पादित सामग्री)
- बांकुड़ा का मानसून हरा कद्दू (कृषि)
- बंगाल का चनाचुर (खाद्य सामग्री)
- बसीरहाट का गमछा (कपड़ा उद्योग)
- गंगारामपुर का खीर दही (खाद्य सामग्री)
- कालीगंज का डोकरा (हस्तकला)
- कुम्हारटोली की मूर्तियां (हस्तकला)
- बंगाल का पान (कृषि)
दो वस्तुएं जिन्हें GI टैग देने से किया गया इनकार?
पश्चिम बंगाल से साल 2017 में दो वस्तुओं को GI टैग के लिए प्रस्तावित किया गया था। इनमें कृष्णनगर का सरपुरिया और कृष्णनगर का सरभाजा शामिल है। दोनों ही खाद्य सामग्री थी। इस दोनों वस्तुओं को GI टैग नहीं प्रदान किया गया क्योंकि इनके समर्थन में भौगोलिक संकेत को साबित करने वाले कोई भी दस्तावेज पेश नहीं किए जा सके थे।
बंगाल की वह चीजें जिन्हें अब तक मिल चुका है GI टैग
- बालुचरी साड़ी
- बंगाल का मसलीन
- बंगाल का नोलेन गुड़ संदेश
- बंगाल का रसगुल्ला
- बांकुड़ा का पंचमुड़ा टेराकोटा क्राफ्ट
- बर्धमान का मिहीदाना
- बर्धमान का सीताभोग
- बंगाल का डोकरा
- बंगाल का पटचित्र
- विष्णुपुर का मोतीचुर लड्डू
- धनियाखाली साड़ी
- गरद साड़ी
- जयनगर का मोआ
- कामारपुकुर सादा बोंदे (बुन्दिया)
- कोरियाल साड़ी
- मादुरकाठी (चटाई)
- मालदह निस्तारी सिल्क का धागा
- मुर्शिदाबाद का छानाबड़ा
- नक्शी कांथा
- पुरुलिया का छऊ मुखौटा
- शांतिनिकेतन की चमड़े से बनी सामग्री
- शांतिपुर साड़ी
- सुन्दरवन का शहद
- बंगाल का टंगाईल साड़ी
- कुशमंडी का लकड़ी का मुखौटा
स्रोत : बंगाल सरकार
नोट : जिन वस्तुओं को GI टैग प्रदान किया गया है उन सभी वस्तुओं के GI टैग की वैधता का निर्धारित समय भी है। इन सभी वस्तुओं की GI टैग की वैधता 2026 से लेकर 2032 के बीच खत्म हो जाएगी।