न्यूयॉर्क (अमेरिका) : फीफा विश्व कप 2026 में अफ्रीकी देशों ने इतिहास रच दिया है। पहली बार महाद्वीप की 10 में से 9 टीमों ने नॉकआउट चरण यानी राउंड ऑफ 32 में जगह बनाई है। इससे पहले किसी एक विश्व कप में अधिकतम दो अफ्रीकी टीमें ही नॉकआउट दौर तक पहुंच सकी थीं। इस उपलब्धि ने विश्व फुटबॉल में अफ्रीका की बढ़ती ताकत को एक बार फिर साबित कर दिया है।
टूर्नामेंट के 17 दिनों के मुकाबलों के बाद मोरक्को, दक्षिण अफ्रीका, सेनेगल, आइवरी कोस्ट, घाना, मिस्र, अल्जीरिया, कांगो और काबो वर्दे ने अंतिम-32 में स्थान सुनिश्चित कर लिया। अफ्रीकी देशों में केवल ट्यूनीशिया ही ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ सका।
अल्जीरिया ने अपने अंतिम ग्रुप मुकाबले में ऑस्ट्रिया के साथ रोमांचक 3-3 से ड्रॉ खेला। इंजरी टाइम में कप्तान रियाद महरेज़ के गोल से अल्जीरिया जीत के करीब पहुंच गया था, लेकिन मुकाबले के आखिरी क्षणों में ऑस्ट्रिया ने बराबरी का गोल दाग दिया। यह परिणाम दोनों टीमों को अगले दौर में पहुंचाने के लिए पर्याप्त साबित हुआ।
कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य ने उज्बेकिस्तान को 3-1 से हराकर विश्व कप इतिहास की पहली जीत दर्ज की। इसी जीत के साथ टीम ने पहली बार नॉकआउट चरण में प्रवेश किया। अब उसका सामना राउंड ऑफ 32 में इंग्लैंड से होगा।
काबो वर्दे ने भी अनोखा रिकॉर्ड बनाया। टीम ने सऊदी अरब के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ खेलकर लगातार तीसरी बार अंक साझा किए और बिना कोई मैच जीते नॉकआउट चरण में पहुंचने वाली 1998 के बाद पहली टीम बन गई। इससे पहले उसने स्पेन और उरुग्वे जैसी मजबूत टीमों को भी ड्रॉ पर रोका था।
काबो वर्दे के अनुभवी गोलकीपर वोज़िन्हा ने भी विश्व कप इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया। 40 वर्ष की उम्र में वह इंग्लैंड के पीटर शिल्टन और इटली के डिनो ज़ोफ़ के बाद विश्व कप में 40 वर्ष की आयु पार करने के बाद एक से अधिक क्लीन शीट रखने वाले केवल तीसरे गोलकीपर बने।
मोरक्को, जिसने 2022 विश्व कप में सेमीफाइनल तक का सफर तय किया था, इस बार भी शानदार लय में दिखा और ग्रुप चरण में ब्राज़ील जैसी मजबूत टीम को 1-1 की बराबरी पर रोक दिया। दूसरी ओर, एशिया से केवल जापान और ऑस्ट्रेलिया ही राउंड ऑफ 32 में जगह बना सके हैं।