कोलकाता : आज भारतीय भाषा परिषद और सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन द्वारा नागार्जुन जयंती के अवसर पर साहित्य संवाद का आयोजन किया गया। स्वागत वक्तव्य देते हुए आशीष झुनझुनवाला ने कहा कि नागार्जुन का जीवन और लेखन लोक कल्याण के लिए रहा। नागार्जुन जयंती के अवसर पर कवि पर्व के तहत साहित्य संवाद आज के समय में एक जरूरी हस्तक्षेप है। अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए परिषद के निदेशक डॉ. शंभुनाथ ने कहा कि कवि अंधेरे में जुगनूँ की तरह है। नागार्जुन के काव्य में ज्येष्ठ का ताप और पूर्णिमा का सौंदर्य है। नागर्जुन एक ऐसे कवि थे जो बिल्कुल असाधारण थे लेकिन साधारण की तरह देखते थे। वे कवियों-लेखकों को एक महा संसार की तरह देखते थे। आज ऐसे कवि बहुत कम हैं जो प्रतिरोध के कवि हों, हाँ असहमति के जरूर हैं। इस अवसर पर चर्चित युवा कवि पराग पावन ने ‘उनसे मिलने निकल जाओ’, ‘साड़ियाँ’, ‘छूने के बारे में कुछ वाक्य’, ‘एक आवाज आती है’, ‘स्त्रियां’, ‘असली हत्यारे’, ‘बेरोज़गार’, कवयित्री ज्योति शोभा ने ‘विस्थापित’, ‘खुदख़ुशी’, ‘एक प्रेम पत्र कितने काम आ रहा है’, ‘मेरे बगल में रहना’, ‘बड़े कवि’ और नागेन्द्र पंडित ने ‘नौकरी टावर’, ‘मेरी माँ कहानियाँ नहीं समझतीं’, ‘मंगल से पृथ्वी की आस’, ‘माँ की भाषा’, ‘आओ सफ़ाई करते हैं’, ‘मैं तो चला जाऊँगा’ शीर्षक कविताओं का पाठ किया। इनकी कविताओं में प्रेम, प्रकृति, प्रतिरोध और आम जीवन के विविध रंग देखने को मिला। संवाद सत्र के अंतर्गत विकास साव, सूर्य देव रॉय, संतोष सिंह, अजय पोद्दार, फरहान अजीज, संजना जायसवाल ने कवियों से सवाल किया।
समीक्षा करते हुए आसनसोल गर्ल्स काॅलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ कृष्ण कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि पराग पावन दुनिया को बदलने का स्वप्न देखने वाले कवि हैं। इनकी कविताएँ ऐसी हैं कि युवा इनसे आकर्षित हुए बिना नहीं रह सकते। डॉ रेशमी पांडा मुखर्जी ने कहा कि नागेंद्र पंडित एक संवेदनशील कवि हैं। इनकी कविताओं में अपने परिवार और जगह के प्रति विशेष लगाव देखने को मिलता है।
मॉडरेटर संजय जायसवाल ने कहा कि नागार्जुन का सौंदर्य बोध हाशिए पर खड़ी जमात के लिए है। कविता की दुनिया मनुष्यता की दुनिया है।
इस अवसर पर कवि परिचय के रूप में शिवम तिवारी, निधि सिंह, कुसुम भगत और सत्यम पांडेय ने काव्य पाठ किया। इस अवसर पर मृत्युंजय श्रीवास्तव, महेश जायसवाल, मंजु श्रीवास्तव, आशुतोष सिंह,सेराज खान बातिश,सुरेश शाॅ, पद्माकर व्यास, फूलचंद राम, संजय दास, आनंद गुप्ता, रितेश पांडे,अमरजीत पंडित, मंटू दास, योगेश साव, धीरज केशरी, डॉ सुमन शर्मा, रूपल साव, संजय यादव, विनोद यादव, मनीषा गुप्ता, डॉ इबरार ख़ान, प्रमोद महतो, चेतना सिंह,चंदना मंडल, सूर्य देव राॅय, अदिति दूबे,अजय पोद्दार,रूपेश यादव, शिखा सिंह,सौमेय्या सरबत, ज्योति सिंह,समेत दर्जनों साहित्यप्रेमी मौजूद थे। धन्यवाद ज्ञापन रामनिवास द्विवेदी ने दिया।