गोवा : छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक की 353वीं वर्षगांठ के अवसर पर शनिवार को देश के विभिन्न हिस्सों में श्रद्धा और उत्साह के साथ शिवराज्याभिषेक दिवस मनाया गया। इस मौके पर गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने सांक्वेलिम में आयोजित कार्यक्रम में छत्रपति शिवाजी महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की और प्रदेशवासियों सहित सभी देशवासियों को शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रमोद सावंत ने कहा कि वह सभी लोगों को शिवराज्याभिषेक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार आज रायगढ़ में शिवराज्य उत्सव मनाया जा रहा है, उसी तरह पूरे देश में छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक दिवस को पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है।
इसी अवसर पर नागपुर में भी छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक की 353वीं वर्षगांठ धूमधाम से मनाई गई। हिंदू पंचांग के अनुसार मनाए जाने वाले शिवराज्याभिषेक दिवस पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और शिवभक्तों ने छत्रपति शिवाजी महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की। लोगों ने हिंदवी स्वराज्य की स्थापना में उनके योगदान और जनकल्याणकारी शासन व्यवस्था की उनकी विरासत को स्मरण किया।
इतिहास के अनुसार छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक वर्ष 1674 में रायगढ़ किले पर ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी के दिन हुआ था। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार यह आयोजन प्रतिवर्ष 6 जून को स्मरण किया जाता है, जबकि इस वर्ष तिथि के अनुसार शिवराज्याभिषेक दिवस 27 जून को मनाया गया।
इस अवसर पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी छत्रपति शिवाजी महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की और सभी शिवभक्तों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने संदेश में लिखा कि अखंड महाराष्ट्र के आराध्य, श्रीमंत योगी छत्रपति शिवाजी महाराज को शिवराज्याभिषेक दिवस पर उनका सादर नमन है तथा सभी शिवप्रेमियों को इस पावन अवसर की हार्दिक शुभकामनाएं।
6 जून 1674 को भव्य समारोह में छत्रपति शिवाजी महाराज ने 'छत्रपति' अर्थात सर्वोच्च सार्वभौम शासक के रूप में राजसिंहासन ग्रहण किया था। हिंदू पंचांग के अनुसार उनका राज्याभिषेक ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि, संवत 1596 में संपन्न हुआ था।
उस दौर में किसी भी राजा के राज्याभिषेक को मुगल सम्राट की स्वीकृति आवश्यक मानी जाती थी, लेकिन छत्रपति शिवाजी महाराज ने मुगल सत्ता को चुनौती देते हुए स्वतंत्र रूप से अपना राज्याभिषेक कराया। इसी के साथ उन्हें औपचारिक रूप से मराठा साम्राज्य का स्वतंत्र शासक घोषित किया गया। इस ऐतिहासिक समारोह को शिवराज्याभिषेक सोहला के नाम से भी जाना जाता है।
छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपने सैन्य नेतृत्व से कई महत्वपूर्ण युद्धों में विजय हासिल की। वर्ष 1665 में मुगल साम्राज्य और मराठों के बीच हुए पुरंदर के युद्ध में उन्होंने फत्तेखान के नेतृत्व वाली सेना को पराजित किया। वहीं प्रतापगढ़ के युद्ध में भी उनकी सेना ने बीजापुर सल्तनत की सेना को शिकस्त दी।
छत्रपति शिवाजी महाराज के नेतृत्व में मराठा शक्ति एक प्रभावशाली राष्ट्रीय ताकत के रूप में उभरी। उन्होंने दक्कन क्षेत्र में शक्तिशाली मुगल साम्राज्य के प्रभुत्व को चुनौती दी और हिंदवी स्वराज्य की मजबूत नींव रखी, जिसे आज भी भारतीय इतिहास के महत्वपूर्ण अध्यायों में गिना जाता है।