असली तृणमूल कौन है? बागियों का गुट या फिर कालीघाट गुट? चुनाव आयोग के सामने जिस समय दोनों पक्ष पार्टी पर अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। ठीक उसी समय 21 जुलाई को कोलकाता के धर्मतल्ला इलाके में विक्टोरिया हाउस के सामने कौन सभा का आयोजन करेगा?
इस बात को लेकर भी दोनों गुटों में जोरदार लड़ाई छिड़ गयी है। पिछले 3 दशकों की परंपरा के मुताबिक ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल यानी कालीघाट गुट ने विक्टोरिया हाउस के सामने सभा करने की अनुमति मांगते हुए पुलिस मुख्यालय लालबाजार को पत्र लिखा है।
दूसरी ओर शनिवार (27 जून) को विक्टोरिया हाउस के सामने तृणमूल की सभा करने की अनुमति मांगते हुए ऋतव्रत बनर्जी के बागी गुट ने भी पुलिस को पत्र लिखा है। हालांकि कोलकाता पुलिस कौन से गुट को अनुमति देगी, इस बारे में अभी तक कुछ भी स्पष्ट नहीं हुआ है।
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न ही अभी तक यह स्पष्ट है कि भाजपा के शासन में विक्टोरिया हाउस के सामने किसी भी गुट को सभा करने की अनुमति दी जाएगी भी या नहीं। लेकिन बागी गुट के सभा करने का फैसला लेने के बाद 1993 की गोलीकांड के विरोध में अब 3 समानांतर सभाएं होने जैसी परिस्थिति पैदा हो गयी है।
प्रदेश कांग्रस ने स्पष्ट किया है कि महाजाति सदन के बजाए 21 जुलाई को वे शहीद मिनार के सामने सभा का आयोजन करेंगे। गत गुरुवार (25 जून) को ही पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक में वर्चुअली घोषणा कर दी थी कि 21 जुलाई को शहीद दिवस मनाया जाएगा। अगर उस दिन 5 लोग ही उनकी सभा में आते हैं, तब भी वह धर्मतला में सभा को संबोधित करेंगी।
कालीघाट में ममता बनर्जी के घर के सामने से ही तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा ने घोषणा की थी कि अगर 21 जुलाई को सभा करने की अनुमति नहीं मिलती है तो सड़कों पर ही हम सभा करेंगे। अगर मंच नहीं बनाने दिया गया तो गाड़ी की छत पर खड़ी होकर ममता बनर्जी सभा को संबोधित करेंगी। लेकिन 21 जुलाई की सभा जरूर होगी।
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अगर लालबाजार ने विक्टोरिया हाउस के सामने 21 जुलाई की सभा करने की अनुमति नहीं दी तो क्या होगा? यह सवाल पूछने पर तृणमूल के बागी गुट के नेता अखरुज्जमान ने कहा कि तब क्या किया जाएगा, इस बारे में तब सोच-विचार होगा।
क्या बागी गुट ममता बनर्जी को सभा में आमंत्रित करेगा? अखरुज्जमान का कहना है कि 21 जुलाई हम सभी के लिए भावुक करने वाला दिन है। उस दिन की सभा में सभी को आमंत्रित किया जा रहा है।