नयी दिल्लीः 'विकसित भारत' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए 'विकसित पूर्वी भारत' और विशेष रूप से 'विकसित बंगाल' की भूमिका बेहद अहम होगी। आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी) के सदस्य और अर्थशास्त्री संजीव सान्याल ने कहा कि पूर्वी भारत में तेज आर्थिक विकास के लिए कोलकाता को फिर से एक मजबूत शहरी और औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करना आवश्यक है।
नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में संजीव सान्याल ने कहा कि यदि भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है, तो पूर्वी भारत को भी समान गति से आगे बढ़ना होगा। उनके अनुसार, पटना, गुवाहाटी, रांची और भुवनेश्वर जैसे शहरों का विकास भी जरूरी है, लेकिन कोलकाता अब भी पूर्वी भारत का सबसे बड़ा शहरी और आर्थिक केंद्र है। इसलिए कोलकाता के विकास से पूरे क्षेत्र में उच्च विकास वाले शहरी केंद्रों का मजबूत नेटवर्क तैयार किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि इसके लिए सबसे पहले कोलकाता के शहरी और औद्योगिक इकोसिस्टम को फिर से सक्रिय करना होगा। शहर में मौजूद बंद या अनुपयोगी औद्योगिक जमीनों का बेहतर उपयोग किया जाना चाहिए। साथ ही ऐसी औद्योगिक नीतियां बनाई जानी चाहिए जो कारोबार और निवेश के लिए अधिक अनुकूल हों।
संजीव सान्याल ने कहा कि बंगाल का इतिहास व्यापार, उद्योग और उद्यमिता से जुड़ा रहा है। उनके मुताबिक, कारोबार करना बंगाल की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा रहा है और अब उसी नवाचार, जोखिम उठाने की क्षमता और उद्यमशीलता की भावना को फिर से जीवित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि 'विकसित बंगाल' को 'विकसित भारत' के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।
राज्य के हालिया बजट पर टिप्पणी करते हुए सान्याल ने कहा कि वित्त मंत्री स्वप्नदास गुप्ता द्वारा पेश बजट नई सोच को दर्शाता है। उनके अनुसार यह बजट स्पष्ट रूप से उद्योग और कारोबार को बढ़ावा देने वाला है। साथ ही इसमें सरकार के वादों के अनुरूप कल्याणकारी योजनाओं का भी प्रावधान किया गया है। उनका मानना है कि यह बजट राज्य के आर्थिक पुनरुद्धार की रूपरेखा प्रस्तुत करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच राजनीतिक तालमेल का लाभ पुराने संस्थानों के पुनर्जीवन में मिल सकता है। बंगाल में कई केंद्रीय और राज्य सरकार के संस्थान ऐसे हैं, जहां लंबे समय से अपेक्षित निवेश नहीं हुआ है। अब दोनों सरकारों के सहयोग से इन संस्थानों को फिर से मजबूत बनाया जा सकता है।
संजीव सान्याल ने कहा कि राज्य के सामने अभी काफी काम बाकी है, लेकिन सरकार ने सही दिशा में पहला कदम उठा दिया है। यदि औद्योगिक सुधार, निवेश और बुनियादी ढांचे पर लगातार काम किया गया, तो बंगाल एक बार फिर पूर्वी भारत के आर्थिक विकास का प्रमुख केंद्र बन सकता है।