नयी दिल्लीः ओला इलेक्ट्रिक के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक भाविश अग्रवाल का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आने वाले समय में कंपनियों के कामकाज के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है। उनका कहना है कि एआई एजेंट्स के बढ़ते इस्तेमाल से कंपनियों में केवल लोगों का प्रबंधन करने वाली मध्य प्रबंधन (मिडिल मैनेजमेंट) की कई परतों की जरूरत कम हो जाएगी, जबकि उत्पाद तैयार करने और वास्तविक समस्याओं का समाधान करने वाले कर्मचारियों का महत्व और बढ़ जाएगा।
भाविश अग्रवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा किए गए एक पोस्ट में बताया कि उन्होंने इस सप्ताह ओला इलेक्ट्रिक के लिए कई एआई एजेंट विकसित किए हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी के आकार बढ़ने के साथ संस्थापक और वास्तविक काम करने वाली टीम के बीच कई स्तर बन जाते हैं, लेकिन एआई एजेंट इस दूरी को कम कर सकते हैं।
उन्होंने लिखा कि एआई एजेंट कंपनियों के संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। उनके अनुसार, ऐसे पद जिनका काम केवल लोगों का प्रबंधन करना है और जो किसी समस्या के समाधान में प्रत्यक्ष योगदान नहीं देते, उनकी आवश्यकता भविष्य में कम हो सकती है। वहीं, उत्पाद विकसित करने और तकनीकी समाधान तैयार करने वाले कर्मचारियों का महत्व पहले से अधिक बढ़ेगा।
भाविश अग्रवाल की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब दुनिया भर की कंपनियां उत्पादकता बढ़ाने, नियमित कार्यों को स्वचालित करने और निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेज बनाने के लिए एआई आधारित सॉफ्टवेयर एजेंट्स का तेजी से इस्तेमाल कर रही हैं। इसके साथ ही कार्यस्थलों पर कर्मचारियों की भूमिकाओं में भी बदलाव देखने को मिल रहा है।
इसी बीच, ओला इलेक्ट्रिक ने हाल ही में तकनीकी क्षेत्र में एक और उपलब्धि हासिल की है। कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई ओला सेल टेक्नोलॉजीज को स्वदेश में विकसित 46100 लिथियम आयरन फॉस्फेट (एलएफपी) बैटरी सेल के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) से प्रमाणन प्राप्त हुआ है।
कंपनी के अनुसार, यह बैटरी सेल पूरी तरह भारत में डिजाइन और निर्मित की गई है। इसका उपयोग भविष्य में ओला इलेक्ट्रिक के इलेक्ट्रिक वाहनों की नई श्रृंखला में किया जाएगा। कंपनी का कहना है कि इससे आयातित बैटरी सेल पर निर्भरता कम होगी और भारत की इलेक्ट्रिक वाहन आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती मिलेगी।
ओला इलेक्ट्रिक लंबे समय से बैटरी सेल, बैटरी पैक, मोटर और सॉफ्टवेयर जैसी प्रमुख तकनीकों को स्वयं विकसित करने की रणनीति पर काम कर रही है। कंपनी का लक्ष्य एकीकृत इलेक्ट्रिक वाहन इकोसिस्टम तैयार कर घरेलू विनिर्माण क्षमता को मजबूत करना है।