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सस्ते आयात पर सख्ती की तैयारी, चीन समेत पांच देशों के उत्पादों की जांच में जुटा भारत

थर्मल पेपर, बीओपीए फिल्म और कुछ एंटीऑक्सीडेंट के आयात पर निगरानी। घरेलू उद्योगों ने लगाया बाजार को नुकसान पहुंचाने का आरोप।

By श्वेता सिंह

Jun 25, 2026 15:04 IST

नई दिल्लीः भारत ने घरेलू उद्योगों की शिकायतों के आधार पर चीन से आयात होने वाले तीन प्रमुख उत्पादों के खिलाफ एंटी-डंपिंग जांच शुरू कर दी है। इस जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या कम कीमत पर आयात किए जा रहे उत्पाद भारतीय कंपनियों को आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं।

वाणिज्य मंत्रालय के अधीन कार्यरत व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) ने थर्मल पेपर, बायएक्सियली ओरिएंटेड पॉलीएमाइड (बीओपीए) फिल्म और कुछ विशेष एंटीऑक्सीडेंट के आयात की जांच शुरू करने का निर्णय लिया है। इस प्रक्रिया में चीन के अलावा दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, अमेरिका और थाईलैंड भी शामिल हैं।

घरेलू कंपनियों ने दर्ज कराई शिकायत

इन मामलों में अलग-अलग भारतीय कंपनियों और उद्योग संगठनों ने डीजीटीआर के समक्ष आवेदन दायर किए हैं। विनती ऑर्गेनिक्स लिमिटेड ने पॉलिमर उद्योग में इस्तेमाल होने वाले कुछ एंटीऑक्सीडेंट के आयात की जांच की मांग की है। कंपनी का आरोप है कि चीन, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर से आने वाले उत्पाद घरेलू उद्योग को प्रभावित कर रहे हैं।

वहीं, जेपीएफएल फिल्म्स ने पैकेजिंग उद्योग में उपयोग होने वाली बीओपीए फिल्म के आयात को लेकर शिकायत दर्ज कराई है। कंपनी का कहना है कि चीन और थाईलैंड से आने वाले सस्ते उत्पाद भारतीय निर्माताओं के लिए प्रतिस्पर्धा को कठिन बना रहे हैं।

इसके अलावा, इंडियन एसोसिएशन ऑफ थर्मल पेपर मैन्युफैक्चरर्स एंड एलाइड इंडस्ट्रीज ने अमेरिका, चीन और दक्षिण कोरिया से आयातित थर्मल पेपर की जांच की मांग की है।

डेकोर पेपर पर भी समीक्षा की मांग

आईटीसी लिमिटेड ने चीन से आयातित डेकोर पेपर पर पहले से लागू एंटी-डंपिंग शुल्क की अवधि समाप्त होने से पहले उसकी समीक्षा (सनसेट रिव्यू) की मांग की है। इसका उद्देश्य यह आकलन करना है कि शुल्क हटाने पर घरेलू उद्योग पर क्या असर पड़ सकता है।

क्या होती है एंटी-डंपिंग जांच?

डीजीटीआर का काम यह जांचना है कि विदेशी कंपनियां किसी उत्पाद को अपने घरेलू बाजार या उत्पादन लागत से कम कीमत पर भारत में बेच रही हैं या नहीं। यदि जांच में यह साबित होता है कि ऐसे आयात से भारतीय उद्योगों को वास्तविक नुकसान पहुंचा है, तो एंटी-डंपिंग शुल्क लगाने की सिफारिश की जा सकती है।

हालांकि, अंतिम फैसला वित्त मंत्रालय द्वारा लिया जाता है। शुल्क लागू होने पर संबंधित उत्पादों के आयात पर अतिरिक्त कर लगाया जाता है, जिससे घरेलू कंपनियों को समान प्रतिस्पर्धी माहौल मिल सके।

चीन से बढ़ते व्यापार पर भी नजर

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-चीन व्यापार तनाव और चीन की अतिरिक्त औद्योगिक क्षमता के कारण वैश्विक बाजारों में सस्ते उत्पादों की आपूर्ति बढ़ी है। ऐसे में भारत अपने उद्योगों को संभावित नुकसान से बचाने के लिए सतर्क रुख अपना रहा है।

वित्त वर्ष 2025-26 में चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनकर उभरा। दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 151.1 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। इस दौरान भारत का चीन को निर्यात 36.66 प्रतिशत बढ़कर 19.47 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 16 प्रतिशत बढ़कर 131.63 अरब डॉलर हो गया। इसके परिणामस्वरूप व्यापार घाटा बढ़कर रिकॉर्ड 112.6 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष में 99.2 अरब डॉलर था।

भारत पहले भी चीन समेत कई देशों से आने वाले सस्ते आयात पर एंटी-डंपिंग शुल्क लगा चुका है। नई जांचों को घरेलू विनिर्माण क्षेत्र की सुरक्षा और निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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