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बीजेडी में बड़ा बदलाव: पूर्व आईएएस सुजाता राउत कार्तिकेयन की एंट्री से बढ़ी राजनीतिक हलचल

नवीन पटनायक की मौजूदगी में हुआ औपचारिक प्रवेश, प्रशासनिक अनुभव से पार्टी को उम्मीदें

By प्रियंका महतो

Jun 25, 2026 14:57 IST

भुवनेश्वर : ओडिशा की प्रमुख प्रशासनिक हस्तियों में शुमार रहीं पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी सुजाता राउत कार्तिकेयन ने गुरुवार को बीजू जनता दल (बीजेडी) का दामन थाम लिया। दो दशकों से अधिक के प्रशासनिक अनुभव के साथ उनका राजनीति में प्रवेश राज्य की सियासत में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

बीजेडी में उन्हें औपचारिक रूप से पार्टी के वरिष्ठ नेता और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने शामिल कराया। इस दौरान आयोजित समारोह में सुजाता राउत कार्तिकेयन ने नवीन पटनायक से आशीर्वाद लेते हुए नई जिम्मेदारी संभालने की शुरुआत की।

इस राजनीतिक प्रवेश से पहले सुजाता राउत कार्तिकेयन 2,000बैच की आईएएस अधिकारी रही हैं। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी बेहद उत्कृष्ट रही है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री प्राप्त की, जहां वे विश्वविद्यालय टॉपर रहीं। इसके बाद उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में परास्नातक किया।

प्रशासनिक प्रशिक्षण के दौरान उन्हें लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में अशोक बमावाले पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था, जो सर्वश्रेष्ठ अधिकारी प्रशिक्षु को दिया जाता है।

अपने प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान उन्होंने ओडिशा में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया और कई जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़ी रहीं। सुंदरगढ़ जिले की कलेक्टर के रूप में उन्होंने छात्राओं के लिए साइकिल वितरण कार्यक्रम शुरू किया, जिसे बैंक के सहयोग से लागू किया गया था। इस योजना का उद्देश्य आदिवासी क्षेत्रों में स्कूल छोड़ने की दर को कम करना था, जिसे बाद में पूरे राज्य में विस्तार दिया गया।

उन्होंने ग्रामीण युवाओं विशेषकर हॉकी जैसे खेलों को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और जिले में खेल अवसंरचना के विकास में योगदान दिया। सुजाता राउत कार्तिकेयन को 2006 में सुंदरगढ़ में मध्याह्न भोजन योजना में अंडों को शामिल करने के लिए भी जाना जाता है, जिसे बाद में राज्य सरकार ने पूरे ओडिशा में लागू किया।

इसके बाद वे कटक जिले की पहली महिला कलेक्टर बनीं और सामाजिक कल्याण विभाग की निदेशक के रूप में कार्य करते हुए मातृत्व लाभ योजना ‘ममता योजना’ की शुरुआत में अहम भूमिका निभाई। यह योजना गर्भवती महिलाओं और नई माताओं को आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी।

वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के रूप में वे ओडिशा सरकार की प्रमुख योजना ‘मिशन शक्ति’ से भी गहराई से जुड़ी रहीं। उनके कार्यकाल में इस कार्यक्रम का व्यापक विस्तार हुआ, जिससे महिला स्वयं सहायता समूहों को ऋण सहायता, उद्यमिता विकास और सरकारी आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी के अवसर मिले।

इसके अलावा उन्होंने संस्कृति विभाग की सचिव के रूप में भी कुछ समय तक कार्य किया और भुवनेश्वर में पहली विश्व ओड़िया भाषा सम्मेलन के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस सम्मेलन में भाषा विशेषज्ञों, प्रवासी ओड़िया समुदाय के सदस्यों और देश-विदेश के छात्रों ने भाग लिया था।

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