शिमला : हिमाचल प्रदेश में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच कांगड़ा जिले की एक विशेष अदालत ने एक आरोपी को दोषी ठहराते हुए पांच वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि आरोपी जुर्माना अदा नहीं करता है तो उसे अतिरिक्त एक वर्ष का साधारण कारावास भुगतना होगा।
धर्मशाला स्थित वक्फ न्यायाधिकरण एवं विशेष न्यायाधीश अदालत ने मलकियत सिंह को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम की धारा 21 के तहत दोषी पाया। अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और सुनवाई के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर अदालत ने यह फैसला सुनाया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह मामला 3 अप्रैल 2021 को नूरपुर पुलिस जिला के अंतर्गत इंदौरा पुलिस थाना में दर्ज किया गया था। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने विस्तृत जांच की और पर्याप्त साक्ष्य जुटाने के बाद सक्षम न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपी के खिलाफ विभिन्न साक्ष्य प्रस्तुत किए। अदालत ने इन साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए मलकियत सिंह को दोषी करार दिया और सजा सुनाई।
हिमाचल प्रदेश पुलिस ने अपने बयान में कहा कि यह फैसला राज्य में नशा तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। पुलिस का कहना है कि मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल लोगों को कानून के दायरे में लाने और उन्हें सजा दिलाने के प्रयास लगातार जारी रहेंगे।
पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे नशे के कारोबार और मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़ी किसी भी जानकारी को आपातकालीन हेल्पलाइन 112 पर साझा करें। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि सूचना देने वालों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
राज्य पुलिस ने यह भी दोहराया कि हिमाचल प्रदेश में नशीले पदार्थों से जुड़े अपराधों के खिलाफ कार्रवाई को और अधिक तेज किया जाएगा तथा संगठित तस्करी नेटवर्क पर विशेष नजर रखी जाएगी।
इस बीच मई महीने में मुख्यमंत्री के ‘एंटी चिट्टा जन आंदोलन’ के तहत चलाए जा रहे राज्यव्यापी नशा विरोधी अभियान को और मजबूत करते हुए हिमाचल प्रदेश पुलिस ने आदतन नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल शुरू किया था। पुलिस ने अवैध मादक पदार्थ और मन:प्रभावी पदार्थ तस्करी निवारण अधिनियम (पीआईटी एनडीपीएस एक्ट), 1988 के तहत कार्रवाई को तेज किया।
हिमाचल प्रदेश पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार लगातार खुफिया जानकारी जुटाने, तकनीकी निगरानी, आपराधिक प्रोफाइलिंग और संगठित ड्रग सिंडिकेट के आगे और पीछे के नेटवर्क की जांच के आधार पर पुलिस ने सक्षम प्राधिकारी से जारी 15 निवारक निरोध आदेशों को सफलतापूर्वक लागू किया। ये आदेश उन आरोपियों के खिलाफ थे जो बार-बार मादक पदार्थों, विशेष रूप से चिट्टा और हेरोइन की तस्करी में शामिल पाए गए थे।
राज्य के विभिन्न जिलों में कुल 15 निवारक निरोध की कार्रवाई की गई। सिरमौर और कुल्लू जिलों में सबसे अधिक चार-चार लोगों को निरुद्ध किया गया। इसके बाद कांगड़ा और बिलासपुर में दो-दो मामलों में कार्रवाई हुई। वहीं देहरा पुलिस जिला, सोलन और मंडी में एक-एक निवारक निरोध आदेश लागू किया गया।
पुलिस के अनुसार जिन लोगों को हिरासत में लिया गया है, वे आदतन अपराधी हैं और उनकी लगातार नशा तस्करी गतिविधियां सार्वजनिक सुरक्षा, सामाजिक सौहार्द और हिमाचल प्रदेश के युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर खतरा बन चुकी थीं।
हिमाचल प्रदेश पुलिस का कहना है कि राज्य को नशा मुक्त बनाने के लिए संगठित ड्रग नेटवर्क पर लगातार प्रहार किया जाएगा और कानून के तहत उपलब्ध सभी प्रावधानों का उपयोग कर ऐसे अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।