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चार साल बाद नीतीश कुमार से मिले आरसीपी सिंह, बिहार की राजनीति में बढ़ी नई सियासी हलचल

मुलाकात के बाद बोले- रिश्ता आज भी कायम है, हर मुलाकात नई पारी की शुरुआत होती है।

पटना : बिहार की राजनीति में शनिवार को उस समय हलचल तेज हो गई, जब जनता दल (यूनाइटेड) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने करीब चार वर्षों के अंतराल के बाद पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि दोनों के बीच संबंध आज भी पहले जैसे बने हुए हैं और जब भी मुलाकात होती है, तब एक नई पारी की शुरुआत होती है।

आरसीपी सिंह ने पटना स्थित 7, सर्कुलर रोड स्थित नीतीश कुमार के आवास पर उनसे मुलाकात की। मुलाकात के बाद उन्होंने पीटीआई वीडियो से बातचीत में कहा कि वह चार साल से अधिक समय बाद नीतीश बाबू से मिले हैं। यह एक सुखद मुलाकात रही और दोनों के बीच आत्मीय बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि वह पिछले 25 वर्षों से नीतीश कुमार के साथ जुड़े रहे हैं और उनके बीच का संबंध आज भी कायम है। उनका यह भी दावा था कि नीतीश कुमार की शारीरिक भाषा से स्पष्ट लग रहा था कि वह उनसे मिलकर खुश थे।

उन्होंने आगे कहा कि जब भी कोई मुलाकात होती है तो नई पारी की शुरुआत होती है। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में भी वह नीतीश कुमार से दोबारा मुलाकात करेंगे।

हालांकि, जनता दल (यूनाइटेड) ने इस मुलाकात को लेकर पार्टी में उनकी वापसी की अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। पार्टी के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि आरसीपी सिंह के साथ पार्टी का अनुभव बेहद कड़वा रहा है। उनके अनुसार, पार्टी के भीतर उनकी गतिविधियां सुनियोजित तरीके से संगठन को कमजोर करने वाली थीं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में जनता दल (यूनाइटेड) की सीटें घटकर केवल 43 रह गई थीं। अब सवाल यह है कि वह पार्टी को और कितना नीचे ले जाएंगे।

नीरज कुमार ने कहा कि उन्हें आरसीपी सिंह पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। उनका आरोप था कि विधानसभा चुनाव के दौरान आरसीपी सिंह ने नीतीश कुमार को सक्रिय राजनीति में बने रहने के योग्य तक नहीं बताया था।

वर्ष 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में 243 सदस्यीय विधानसभा में जनता दल (यूनाइटेड) को केवल 43 सीटें मिली थीं। वहीं राष्ट्रीय जनता दल ने 75 और भारतीय जनता पार्टी ने 74 सीटों पर जीत दर्ज की थी। यह प्रदर्शन जनता दल (यूनाइटेड) के इतिहास का सबसे कमजोर चुनावी प्रदर्शन माना गया।

नालंदा जिले के रहने वाले आरसीपी सिंह भारतीय प्रशासनिक सेवा के उत्तर प्रदेश कैडर के अधिकारी रहे हैं। जब नीतीश कुमार रेल मंत्री थे और आरसीपी सिंह केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत थे, तभी दोनों के बीच निकटता बढ़ी। बाद में नीतीश कुमार के बिहार का मुख्यमंत्री बनने पर उन्होंने आरसीपी सिंह को अपना प्रधान सचिव नियुक्त किया। वह वर्ष 2010 तक इस पद पर रहे। इसके बाद स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर उन्होंने जनता दल (यूनाइटेड) की सदस्यता ग्रहण कर ली।

पार्टी में शामिल होने के बाद आरसीपी सिंह का राजनीतिक कद तेजी से बढ़ा। वर्ष 2020 में उन्हें जनता दल (यूनाइटेड) का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। हालांकि, उसी वर्ष हुए विधानसभा चुनाव में संगठन महासचिव के रूप में उनके प्रदर्शन पर सवाल भी उठे, क्योंकि पार्टी को अपने इतिहास का सबसे खराब चुनावी परिणाम मिला।

वर्ष 2021 में आरसीपी सिंह का केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होना भी उनके और नीतीश कुमार के रिश्तों में दूरी का कारण बना। दरअसल, नीतीश कुमार जनता दल (यूनाइटेड) को केंद्र सरकार में केवल प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व दिए जाने के पक्ष में नहीं थे। इसके बाद वर्ष 2022 में नीतीश कुमार ने उन्हें लगातार तीसरी बार राज्यसभा भेजने से इनकार कर दिया। राजनीतिक परिस्थितियों को भांपते हुए आरसीपी सिंह ने केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।

इसी दौरान पार्टी के भीतर उनके विरोधियों ने उन पर भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर जनता दल (यूनाइटेड) में टूट कराने की कोशिश करने का आरोप लगाया। इसके बाद, जब जनता दल (यूनाइटेड) ने भारतीय जनता पार्टी से अलग होकर राष्ट्रीय जनता दल के नेतृत्व वाले महागठबंधन के साथ सरकार बनाई, उसी समय आरसीपी सिंह ने पार्टी छोड़ दी।

इसके बाद आरसीपी सिंह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। हालांकि, वर्ष 2024 में जब जनता दल (यूनाइटेड) दोबारा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में लौट आया, तब उन्होंने अपनी नई राजनीतिक पार्टी 'आप सबकी आवाज' बनाई। बाद में पिछले वर्ष हुए विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने अपनी पार्टी का विलय प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी में कर दिया।

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