नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने राजस्व जिलों के पुनर्गठन के बाद प्रमुख राजस्व एवं प्रशासनिक अधिकारियों को कार्यपालक मजिस्ट्रेट (एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट) की शक्तियां प्रदान करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय से नवगठित जिलों में प्रशासनिक कार्यों और सार्वजनिक सेवाओं के संचालन में तेजी आने की उम्मीद है।
आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, पुनर्गठित जिलों के अधिकार क्षेत्र में कार्यरत उपायुक्त (डिप्टी कमिश्नर)/जिला मजिस्ट्रेट, अपर जिला मजिस्ट्रेट, राजस्व सहायक, तहसीलदार और चकबंदी अधिकारी को कार्यपालक मजिस्ट्रेट के अधिकार दिए जाएंगे। इन अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के निर्वहन का अधिकार प्राप्त होगा।
यह निर्णय भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 14 के तहत लिया गया है। यह संहिता पहले लागू दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) का स्थान ले चुकी है। धारा 14 राज्य सरकार को कार्यपालक मजिस्ट्रेट नियुक्त करने, जिला मजिस्ट्रेट और अपर जिला मजिस्ट्रेट नामित करने तथा उपखंडों के लिए मजिस्ट्रेट नियुक्त करने का अधिकार प्रदान करती है।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि गृह मंत्रालय की 28 जून 2024 की अधिसूचना के अनुसार, बीएनएसएस के अंतर्गत राज्य सरकार को प्राप्त अधिकांश शक्तियां, धारा 523 को छोड़कर, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के संदर्भ में उपराज्यपाल को सौंप दी गई हैं। इसी अधिकार के तहत यह मंजूरी प्रदान की गई है।
सरकार के अनुसार, 25 दिसंबर 2025 को राजस्व विभाग द्वारा जिलों के पुनर्गठन की अधिसूचना जारी किए जाने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने, कानून-व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने और नागरिक सेवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए इन अधिकारियों को कार्यपालक मजिस्ट्रेट की शक्तियां देना आवश्यक हो गया था।
प्रस्ताव को पहले दिल्ली सरकार के गृह मंत्री और मुख्यमंत्री की स्वीकृति मिल चुकी थी। इसके बाद इसे उपराज्यपाल के पास भेजा गया, जिन्होंने अब औपचारिक मंजूरी दे दी है। मंजूरी के बाद दिल्ली सरकार जल्द ही बीएनएसएस, 2023 की धारा 14 के तहत आधिकारिक अधिसूचना जारी कर संबंधित अधिकारियों को कार्यपालक मजिस्ट्रेट की शक्तियां औपचारिक रूप से प्रदान करेगी।