नई दिल्ली: अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान राशि के कथित गबन को लेकर जारी विवाद के बीच वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने मंदिरों की पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि यह प्रकरण भविष्य के लिए सीख साबित होना चाहिए और ऐसी परिस्थितियां दोबारा कभी उत्पन्न नहीं होनी चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के बाद बने राम मंदिर को देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए आदर्श मंदिर प्रबंधन का उदाहरण बनना चाहिए।
राम मंदिर को बताया आदर्श प्रबंधन का प्रतीक
जैन ने कहा कि समाज की यह सामूहिक इच्छा है कि मंदिरों में इस प्रकार की घटनाएं फिर कभी देखने को न मिलें। उन्होंने कहा कि उनके पिता हरिशंकर जैन सहित समाज के अनेक लोग मानते हैं कि राम मंदिर से जुड़े इस मामले से भविष्य के लिए एक सकारात्मक उदाहरण स्थापित होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बनी थी 15 सदस्यीय समिति
उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद राम मंदिर के संचालन के लिए 15 सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। इस समिति में सरकार द्वारा नामित प्रतिनिधियों के साथ संत और शंकराचार्य भी शामिल किए गए थे। उनके अनुसार, इतने व्यापक ढांचे के बावजूद हाल में सामने आए आरोप बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं।
मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी
जैन ने कहा कि धार्मिक संस्थानों के संचालन के लिए अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और उत्तरदायी प्रशासनिक व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है। समाज को ऐसा ढांचा तैयार करना चाहिए जिससे भविष्य में किसी भी मंदिर में इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न न हो।
पूरे देश के मंदिरों के लिए बने मिसाल
उन्होंने कहा कि वर्षों तक चले कानूनी संघर्ष के बाद अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण संभव हो सका है। ऐसे में यह मंदिर केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि देश और दुनिया के लिए आदर्श मंदिर प्रबंधन का मॉडल भी बनना चाहिए। उनका मानना है कि इस दिशा में उठाए गए कदम अन्य धार्मिक संस्थानों के लिए भी प्रेरणा बन सकते हैं।
संतों और शंकराचार्यों के मार्गदर्शन पर दिया जोर
उन्होंने कहा कि मंदिरों के बेहतर संचालन के लिए संतों और शंकराचार्यों का मार्गदर्शन आवश्यक है। उनके अनुसार, आध्यात्मिक नेतृत्व के अनुभव और सुझावों के आधार पर ऐसा प्रबंधन विकसित किया जा सकता है जिससे भविष्य में किसी प्रकार की अनियमितता की आशंका न रहे।
कई राज्यों में मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की मांग
विष्णु शंकर जैन ने मंदिर प्रबंधन के व्यापक मुद्दे का उल्लेख करते हुए कहा कि तमिलनाडु, कर्नाटक, पुदुचेरी और तेलंगाना जैसे राज्यों में मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। उन्होंने कहा कि समाज को यह संकल्प लेना चाहिए कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
ऐतिहासिक और कानूनी दृष्टि से अलग है राम मंदिर का मामला
उन्होंने कहा कि राम मंदिर का विषय अपने ऐतिहासिक और कानूनी महत्व के कारण अन्य मामलों से अलग है। इसलिए इस पूरे प्रकरण से मिले अनुभवों के आधार पर देशभर में मंदिर प्रशासन और प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक मजबूत तथा पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।