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108 घड़ों के पानी से स्नान कर बीमार पड़ेंगे प्रभु जगन्नाथ! जानिए कब है स्नान पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त?

क्या आप जानते हैं रथयात्रा के उत्सव से ठीक पहले भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और उनके बड़े भाई बलभद्र बीमार पड़ जाते हैं जिनके इलाज के लिए वैद्य तक को बुलाना पड़ता है!

By Moumita Bhattacharya

Jun 28, 2026 14:38 IST

बड़ा चार धाम के एक महत्वपूर्ण धाम के रूप में ओडिशा के जगन्नाथ पुरी की गिनती होती है। यहां साल में एक बार रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है, जिसमें लाखों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों से ही नहीं बल्कि दुनिया भर से भगवान जगन्नाथ के भक्त रथ यात्रा में हिस्सा लेने पहुंचते हैं।

इस साल 16 जुलाई को रथ यात्रा का आयोजन किया जाएगा जो 24 जुलाई तक चलेगा। लेकिन क्या आप जानते हैं रथयात्रा के उत्सव से ठीक पहले भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और उनके बड़े भाई बलभद्र बीमार पड़ जाते हैं जिनके इलाज के लिए वैद्य तक को बुलाना पड़ता है!

कब है स्नान पूर्णिमा?

स्नान पूर्णिमा की तिथि 29 जून को पड़ने वाली है, जब भगवान जगन्नाथ समेत तीनों भाई-बहनों को 108 घंड़ों के पवित्र जल से स्नान करवाया जाएगा। इसके बाद तीनों भाई-बहन बीमार पड़ जाएंगे। इस दौरान 15 दिनों तक उनके दर्शन भी बंद रहेंगे। भगवान के स्नान के लिए जगन्नाथ मंदिर के कुएं से ही जल निकाला जाता है जिसमें जड़ी-बुटियां और सुंगधित इत्र मिलाकर उन्हें स्नान करवाया जाता है।

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15 दिनों का एकांतवास

स्नान यात्रा के लिए भगवान जगन्नाथ और बलभद्र को हाथी के रूप से सजाया जाता है जिसे गजानन वेश कहा जाता है। इसके बाद भगवान जगन्नाथ को बुखार आता है जिस दौरान वह अपने भाई-बहन के साथ एकांतवास में चले जाते हैं। इस दौरान प्रभु जगन्नाथ के दर्शन नहीं होते हैं बल्कि उनका विशेष औषधियों से इलाज किया जाता है। उन्हें खास तौर पर बने भोजन भी परोसे जाते हैं।

15 दिनों का एकांतवास पूरा होने के बाद भगवान जगन्नाथ पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर नवयौवन रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं जिसका खास उत्सव मनाया जाता है।

कब है शुभ मुहूर्त?

पूर्णिमा तिथि 29 जून की सुबह 3.06 बजे से शुरू हो जाएगी जो 30 जून सुबह 5.26 बजे समाप्त होगी।

ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 4.06 से 4.46 बजे तक।

अभिजीत मुहूर्त : सुबह 11.57 से दोपहर 12.52 बजे तक।

स्नान पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने का विधान है। इस दिन भगवान विष्णु को तुलसी दल के साथ सात्विक भोग अर्पित की जाती है। शाम को चंद्रोदय के बाद उन्हें जल से अर्घ्य दें और इसके बाद भगवान सत्यनारायण की कथा सुनना या पढ़ना शुभ माना जाता है।

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