पिछले 14 सालों से जेल की सलाखों के पीछे बंद है चिटफंड कंपनी शारदा के मालिक सुदिप्त सेन (Sudipta Sen)। सुदिप्त सेन के जमानत के मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और सीबीआई को कड़ी फटकार लगायी है। मंगलवार को सुदिप्त सेन के जमानत के मामले की सुनवाई पूरी हुई। इसका फैसला अभी तक स्थगित रखा गया है।
अब न्यायाधीश राजर्षि भरद्वाज की खंडपीठ में रुपयों को वापस लौटाने के लिए तालुकदार कमेटी की तरफ से बाजार से वसूला गया रुपए का हिसाब, जब्त की गयी संपत्ति का हिसाब, रुपए जमा करने वाले लोगों से बकाया का हिसाब लेकर जमा करना होगा।
अदालत में बहस के दौरान शिकायतकर्ता के वकील ने बताया कि 289 शारदा समूह के खिलाफ 389 मामले हुए थे। उन्होंने बताया कि अप्रैल 2013 में विधाननगर थाना में मामला दर्ज होने के बाद शारदा के मालिक सुदीप्त सेन को गिरफ्तार किया गया था।
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मामले की जांच करने की जिम्मेदारी सीबीआई को सौंपी गयी जिसके बाद उसने 76 मामले अपने हाथों में लिए। उन्होंने कुल मिलाकर 4 मामले दायर किए। बाकी मामलों में राज्य पुलिस ने चार्जशीट सौंपा। उन चारों मामलों में सुदीप्त सेन को जमानत दे दी गयी। बेल बॉन्ड भी जमा कर दिया गया।
अभी तक राज्य पुलिस के पास मौजूद 308 मामलों में से 2 मामलों का फैसला नहीं आया है। बारासात थाना में दोनों मामलों में अभी तक जमानत नहीं मिली है। हाई कोर्ट के न्यायाधीश ने राज्य सरकार के वकील से पूछा कि साल 2014 में चार्जशीट जमा किया। हालांकि अभी तक ट्रायल भी शुरू नहीं हुआ है। ऐसे में एक व्यक्ति को कैसे रोक कर रखा जाएगा?
वकील ने बताया कि बारासात थाना के एक मामले में कागजात नहीं मिल रहे थे। 2024 में कागजात मिले। इतना सुनते ही न्यायाधीश ने सीबीआई से पूछा कि सीबीआई ट्रायल कब खत्म करेगी? सिर्फ जमानत मिल गया क्या इतना ही काफी है? ट्रायल करवाने की कोई जिम्मेदारी सीबीआई की नहीं है? वरना कैसे रोक कर रखा जाएगा?
रिपोर्ट देखने के बाद न्यायाधीश ने पूछा कि शारदा के 9 बंगले और एक फ्लैट मात्र 52 लाख रुपए में बिका है। यह किसने किया? इतने कम रुपयों में कैसे बिका? इस बारे में हमें विस्तार से बताना होगा। यह रिपोर्ट में ही बताया गया है। मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल को होगी।