मुंबईः टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। एयरलाइन ने मंगलवार को जानकारी दी कि उसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक कैंपबेल विल्सन ने पद छोड़ने का निर्णय लिया है और उनके उत्तराधिकारी की तलाश के लिए एक समिति गठित की गई है।
पहले ही दे चुके थे इस्तीफे का संकेत
न्यूजीलैंड मूल के विल्सन पहले सिंगापुर एयरलाइंस से जुड़े थे, पिछले चार वर्षों से एयर इंडिया का नेतृत्व कर रहे थे। कंपनी के अनुसार उन्होंने 2024 में ही चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को 2026 में पद छोड़ने की अपनी योजना से अवगत करा दिया था और तब से वे संगठन और नेतृत्व टीम को स्थिर बनाने पर काम कर रहे थे ताकि बदलाव सुचारु तरीके से हो सके।
नए सीईओ की तलाश, तब तक जिम्मेदारी जारी
एयर इंडिया बोर्ड ने एक समिति बनाई है, जो आने वाले महीनों में नए सीईओ का चयन करेगी। वे तब तक विल्सन अपने पद पर बने रहेंगे, जब तक उनके उत्तराधिकारी की घोषणा नहीं हो जाती।
निजीकरण के बाद संभाली थी कमान
विल्सन ने सितंबर 2022 में एयर इंडिया की कमान संभाली थी, जब यह पहले सरकारी एयरलाइन निजीकरण के बाद टाटा समूह के पास आई।
विवाद और आलोचनाएं भी रहीं
उनके कार्यकाल के दौरान अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की उड़ान 12 जून को दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी, जिसमें 250 से अधिक लोगों की मौत हुई। इसके अलावा विभिन्न मौकों पर सुरक्षा मानकों के उल्लंघन को लेकर भी उन पर आलोचना हुई।
टाटा समूह ने सराहा योगदान और चुनौतियों का जिक्र
टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने विल्सन के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में एयर इंडिया ने कई क्षेत्रों में प्रगति की। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी को कोविड के बाद लंबे समय तक सप्लाई चेन में बाधाएं, नए विमानों की डिलीवरी और रेट्रोफिट कार्यक्रमों में देरी, साथ ही वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, फिर भी टीम ने इन परिस्थितियों से निपटते हुए आगे बढ़ने का काम किया।
विल्सन ने गिनाईं उपलब्धियां और बदलाव
विल्सन ने कहा कि एयर इंडिया के निजीकरण के बाद चार एयरलाइंस का अधिग्रहण और सफल विलय हुआ। इसके साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र की कार्यशैली से निजी क्षेत्र की ओर बदलाव, नेतृत्व टीम, कार्यबल, कार्य संस्कृति और संचालन के तरीकों में व्यापक परिवर्तन किए गए। इस दौरान सिस्टम का पूरी तरह आधुनिकीकरण हुआ, नए प्रोडक्ट लॉन्च किए गए, जमीन और हवाई सेवाओं के स्तर को बेहतर बनाया गया और बेड़े में 100 अतिरिक्त विमान जोड़े गए।
एयर इंडिया एक्सप्रेस में भी नेतृत्व का अभाव
एयर इंडिया की लो-कॉस्ट सहायक कंपनी एयर इंडिया एक्सप्रेस में भी शीर्ष पद खाली है। इसके प्रबंध निदेशक आलोक सिंह ने 19 मार्च को अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद पद छोड़ दिया था।